बड़वानी; रिश्तो को कलंकित करने वाले भाई के हत्यारे भाई को आजीवन कारावास एवं अर्थदण्ड से दंडित किया

बड़वानी; न्यायालय विशेष न्यायाधीश (एट्रोसिटीज एक्ट) बड़वानी श्री लीलाधर सोलंकी द्वारा पारित अपने फैसले में हत्या करने के आरोप में आरोपी सुमित पिता दिनेश पंवार उम्र 18 वर्ष निवासी विद्युत नगर हवा बंगला के पास इंदौर (म.प्र.) को धारा 103(1) बीएनएस में आजीवन कारावास व 10,000 रूपये अर्थदंड व धारा एवं 238 बीएनएस में 03 वर्ष का कठोर कारावास व 5000 रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया। उक्त प्रकरण को प्रशासन द्वारा चिन्हित जघन्य एवं सनसनीखेज प्रकरण में चिन्हित किया गया था अभियोजन के प्रस्तुत तर्क एवं वैज्ञानिक एवं अन्य साक्ष्य के साक्ष्य से सहमत होकर न्यायालय द्वारा आरोपी सुमित को आजीवन कारावास से दंडित किया गया। अभियोजन की ओर से पैरवी श्री महेश पटेल सहायक निदेशक अभियोजन जिला बड़वानी म.प्र. अभियोजन अधिकारी बडवानी द्वारा की गई।
अभियोजन मीडिया प्रभारी श्रीमती मीना कुशवाह सहायक जिला अभियोजन अधिकारी बड़वानी ने बताया कि सूचनाकर्ता अरविंद ने 20 सितम्बर 2025 को थाना राजपुर में उपस्थित होकर इस आशय की सूचना दी कि इंदिरा सागर नहर में गांव के अजय पिता दिनेश पंवार निवासी ग्राम खड़कल की लाश पड़ी है। भौतिक साक्ष्यों के आधार पर संदेही मृतक के भाई सुमित पिता दिनेश पंवार से घटना के संबंध में पूछताछ करते सुमित द्वारा बताया कि उसके भाई अजय की पत्नी छाया से उसके अवैध शारीरिक संबंध थे। जिस कारण से आरोपी सुमित एवं उसके भाई अजय का विवाद होने लगा था जिस कारण से आरोपी सुमित ने सोचा कि भाई अजय को रास्ते से हटा दूं।घटना दिनांक को आरोपी सुमित अजय को इंदौर से ग्राम खडकल लेकर गया एवं रास्ते में अजय को शराब पिला दी, तो अजय नशे में कार में सो गया आरोपी सुमित ने रस्सी लेकर आया और उसकी भाभी को भी बुलाया उन दोनों ने मिलकर अजय को पेशाब के बहाने अजय को कार से बाहर निकाला और आरोपी सुमित ने वहीं पास में पड़े पत्थर से अजय को सिर में मारा एवं अजय को रस्सी से कार के पीछे बांधकर रोड़ पर घसीटा, और उसके बाद अजय को नहर में ले जाकर फेक दिया। जिसका पुलिस थाना राजपुर में अपराध क्रमांक 584/2025 अंतर्गत धारा 103(1), 103(1)/3(5) व 238 बी.एन.एस. का पंजीबद्ध किया गया। न्यायालय में प्रस्तुत किया गया पुलिस ने अनुसंधान के दौरान आरोपी को गिरफ्तार किया और प्रकरण की विवेचना पूर्ण कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया।



