शिव महापुराण में संतों ने अधिवक्ता विमला शर्मा को महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की , मिला नया आध्यात्मिक नाम साध्वी विमलानंद महाराज
सार्वभौम सनातन धर्म महासभा ने सम्मान-पत्र प्रदान कर साध्वी विमलानंद महाराज नाम से किया अलंकृत साध्वी विमलानंद महाराज

जनोदय पंच। श्री शिव महापुराण कथा के छठे दिवस आध्यात्मिक वातावरण के बीच सार्वभौम सनातन धर्म महासभा ने अधिवक्ता विमला शर्मा को सम्मान-पत्र प्रदान कर महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की गई। उन्हें नया आध्यात्मिक नाम साध्वी विमलानंद महाराज दिया गया। कथा में बाणासुर, काल भैरव, रावण और भक्ति के महत्व से जुड़े प्रसंग सुनाए गए।
श्री शिव महापुराण के छठे दिवस आयोजित कथा के दौरान उपस्थित संतों ने अधिवक्ता विमला शर्मा को महामंडलेश्वर की उपाधि प्रदान की। इस अवसर पर उन्हें नया आध्यात्मिक नाम साध्वी विमलानंद महाराज दिया गया। कथा स्थल पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने इस अवसर का साक्षी बनकर संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया।
बाणासुर प्रसंग के माध्यम से भक्ति का महत्व बताया
कथा के दौरान बाणासुर का प्रसंग सुनाया गया। बताया गया कि बाणासुर भगवान महादेव का महान भक्त था और उसी की बनाई धुन पर भगवान महादेव ने तांडव नृत्य किया था। यह भी बताया गया कि एक अवसर पर बाणासुर की रक्षा के लिए भगवान महादेव और भगवान नारायण के बीच युद्ध हुआ। कथा में कहा गया कि सच्चे भक्त की रक्षा के लिए भगवान सदैव तत्पर रहते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि भक्त की दुर्गति भगवान कभी नहीं होने देते, क्योंकि वे अपने भक्त के वश में होते हैं।


तुलसी, मालती और आंवला लगाने का दिया संदेश
कथा में कहा गया कि प्रत्येक घर में आंवला, तुलसी और मालती का पौधा लगाया जाना चाहिए। इन्हें महाकाली, महासरस्वती और महालक्ष्मी का प्रतीक बताते हुए कहा गया कि जहां ये तीनों शक्तियां विराजमान होती हैं, वहां विपत्तियां दूर होती हैं। कथा के दौरान प्रद्युम्न अपहरण, नंदी अवतार, काल भैरव पूजा तथा रावण के दस शीश से जुड़े प्रसंग भी विस्तार से सुनाए गए। श्रद्धालुओं को बताया गया कि भगवान की भक्ति ही मनुष्य का सर्वोपरि कार्य है तथा भक्ति के माध्यम से ही भगवान की प्राप्ति और मुक्ति संभव है।


समाजजनों ने किया सम्मान
कथा के दौरान अग्रवाल समाज, ब्राह्मण समाज एवं दसोरा समाज के प्रतिनिधियों ने गुरुदेव का सम्मान किया। इस अवसर पर अनूप गोयल, वंदना गोयल, रेखा एवं उमेश गर्ग यजमान के रूप में उपस्थित रहे। कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लेकर धार्मिक प्रसंगों का श्रवण किया।



