सेंधवा में शिव महापुराण कथा का विश्राम दिवस, भजनों पर झूमी मातृशक्ति, भक्तों ने सुनी ज्योतिर्लिंग कथा
कथा के सातवें दिन गुरुदेव का सम्मान हुआ, नपाध्यक्ष बसंती देवी ने सपरिवार आरती की

जनोदय पंच। सेंधवा कृषि उपज मंडी किले के अंदर मंडी सेट में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन भजन, कथा और धार्मिक प्रसंगों का आयोजन हुआ। कथा में 12 ज्योतिर्लिंग, शिवरात्रि और चंद्रमा से जुड़े प्रसंगों का महत्व बताया गया।
सेंधवा कृषि उपज मंडी किले के अंदर मंडी सेट में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन विश्राम दिवस पर संगीतकार ने ‘कैलाश पर ऐसा डमरू बजाया भोलेनाथ ने, पूरा संसार मगन हो गया’ भजन प्रस्तुत किया। भजन पर मातृशक्ति झूम उठी। कथा में बताया गया कि मनुष्य जन्म-जन्मांतर के कर्मों को भोगने के लिए जन्म लेता है और ईश्वर सभी जीवों के जन्म के कर्मों का हिसाब रखते हैं। इंसान, पक्षी, पशु या कोई भी जीव हो, कर्मों का महत्व बताया गया।

12 ज्योतिर्लिंग और भक्ति का महत्व बताया
गुरुदेव ने 12 ज्योतिर्लिंगों की कथा श्रवण के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि विवेकी मनुष्य कथा सुनता है, भजन करता है और प्रभु का नाम जपता है। मानव जीवन में भक्ति करने, कथा सुनने और पुण्य कमाने का संदेश दिया गया। कथा में 84 लाख योनियों का भी उल्लेख किया गया। शिवरात्रि के महत्व पर भी प्रकाश डालते हुए बताया गया कि शिवरात्रि की कथा श्रद्धा से सुनने से जीवन में दुख नहीं रहता और धन-धान्य की कमी नहीं होती।
चंद्रमा के प्रसंग से समझाया ज्योतिर्लिंगों का महत्व
कथा में बताया गया कि चंद्रमा की 27 पत्नियां 27 नक्षत्रों के नाम से जानी जाती हैं और वे राजा दक्ष की बेटियां थीं। इनमें रोहिणी सबसे सुंदर थीं। अन्य पत्नियों की शिकायत पर चंद्रमा को क्षयरोग का श्राप मिला, जो देवाधिदेव महादेव की कृपा से दूर हुआ। कथा के अनुसार, चंद्रमा ने नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया। 16 कलाओं तक चंद्रमा का प्रकाश कम होता है, इसके बाद पूर्णिमा तक बढ़ता जाता है। सोमनाथ महादेव के दर्शन और पूजन से क्षयरोग दूर होने तथा मल्लिकार्जुन भगवान के दर्शन से पुत्र सुख प्राप्त होने की बात भी बताई गई।

सम्मान और आरती का आयोजन
श्री शिव महापुराण कथा के सातवें दिन गौरी शंकर कथा समिति सेंधवा की निर्मला ठक्कर और राजू नरेड़ी दंपती द्वारा गुरुदेव का सम्मान किया गया। नगर की प्रथम नागरिक नपाध्यक्ष बसंती देवी ने सपरिवार आरती की और सेंधवा शहर की बेटी विमलेश्वरानंद, पूर्व नाम विमला शर्मा, का सम्मान किया। इस दौरान पंडाल में उपस्थित श्रोता भावुक हो गए। निवाली से आए भक्तों ने भी गुरुदेव का स्वागत किया।



