इंदौर में बाल संरक्षण आश्रम में रक्षाबंधन की खुशियां, कलेक्टर शिवम वर्मा और विधायक गोलू शुक्ला ने बच्चों संग मनाया पर्व
बच्चों से राखियां बंधवाईं, उपहार दिए और उनका हाल-चाल जाना; विधायक ने आश्रम से 25 वर्षों के जुड़ाव का अनुभव साझा किया।

जनोदय पंच। इंदौर के नसिया रोड छावनी स्थित शासकीय बाल संरक्षण आश्रम में रक्षाबंधन का पर्व आत्मीयता और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कलेक्टर शिवम वर्मा और क्षेत्रीय विधायक राकेश गोलू शुक्ला ने बच्चों के साथ समय बिताकर राखियां बंधवाईं और उपहार भेंट किए।
बच्चों के बीच मनाया रक्षाबंधन
रक्षाबंधन के अवसर पर कलेक्टर शिवम वर्मा और क्षेत्रीय विधायक राकेश गोलू शुक्ला शासकीय बाल संरक्षण आश्रम पहुंचे। दोनों ने आश्रम में रह रहे बच्चों के साथ बैठकर रक्षाबंधन मनाया। बच्चों ने उनकी कलाई पर राखियां बांधीं। इसके बाद कलेक्टर और विधायक ने बच्चों को स्नेहपूर्वक उपहार भेंट किए। उपहार मिलने पर बच्चों के चेहरों पर खुशी नजर आई।
बच्चों से की चर्चा, जाना हाल-चाल
आयोजन के दौरान कलेक्टर शिवम वर्मा और विधायक राकेश गोलू शुक्ला ने बच्चों के साथ बैठकर चर्चा की और उनका हाल-चाल जाना। दोनों ने बच्चों के साथ समय बिताया और रक्षाबंधन के पर्व में सहभागिता की। आयोजन के दौरान आश्रम का माहौल आत्मीय रहा।
25 वर्षों से आश्रम से जुड़ाव
मीडिया से चर्चा करते हुए क्षेत्रीय विधायक राकेश गोलू शुक्ला ने आश्रम से अपने लंबे समय के जुड़ाव का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि वे और उनकी पूरी टीम विगत 25 वर्षों से निरंतर इस आश्रम में आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण आश्रम में आकर इन बच्चों के साथ समय बिताना और उनके साथ त्योहार मनाना उन्हें असीम प्रसन्नता और आत्मिक शांति देता है।
बच्चों की सुविधाओं पर ध्यान
विधायक राकेश गोलू शुक्ला ने बताया कि आश्रम में बच्चों की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा जा रहा है। बच्चों के लिए एक बहुत बढ़िया किचन बनवाया गया है, जिससे उनके भोजन की उचित व्यवस्था हो सके। इसके अलावा परिसर में बच्चों के खेलने-कूदने के लिए एक सुंदर बगीचा भी विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि बच्चों की जो भी आवश्यकताएं होती हैं, उन्हें प्राथमिकता के साथ पूरा किया जाता है।
त्योहारों पर लौटकर आते हैं पुराने बच्चे
राकेश गोलू शुक्ला ने बताया कि दीपावली हो या रक्षाबंधन, सभी प्रमुख त्योहार इन्हीं बच्चों के बीच मनाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि जो बच्चे कभी 2-3 साल की उम्र में आश्रम आए थे, वे आज 24-25 साल के हो गए हैं और आश्रम से जा चुके हैं। इसके बावजूद वे रक्षाबंधन के पर्व को भूले नहीं हैं और आज भी इस दिन आश्रम आते हैं। इस तरह बच्चों के साथ त्योहार मनाने की परंपरा उनके बीच अपनत्व और परिवार जैसा भाव बनाए रखती है।


