इंदौर में ठेले हटाने की कार्रवाई पर सियासी घमासान, कुणाल सोलंकी के प्रदर्शन के बाद बबलू शर्मा ने की सख्त कार्रवाई की मांग
हॉकर जोन, गरीबों के रोजगार और अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर कांग्रेस पार्षद और भाजपा पार्षद के बयानों से बढ़ी बहस

जनोदय पंच। इंदौर में ठेले और गुमटियां हटाने की नगर निगम की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। ठेला चालकों के समर्थन में प्रदर्शन हुआ, वहीं निगम की कार्रवाई में बाधा डालने वालों पर सख्ती की मांग उठी। हॉकर जोन और गरीबों के रोजगार का मुद्दा भी चर्चा में है।
रिमूवल वाहन के सामने बैठकर किया प्रदर्शन
शुक्रवार को कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी ने नेमावर रोड पर नगर निगम के रिमूवल अमले की कार्रवाई का विरोध किया। निगम की टीम अवैध ठेले और गुमटियां हटाने पहुंची थी। इस दौरान सोलंकी रिमूवल वाहन के सामने बैठ गए और ठेले वापस लौटाने की मांग की।
गलियों में कारोबार करने वाले ठेला चालकों की कार्रवाई पर उठाए सवाल
कुणाल सोलंकी ने आरोप लगाया कि नगर निगम की रिमूवल टीम ने गलियों में कारोबार कर रहे ठेला चालकों के ठेले उठाए और उनकी सब्जियां व सीताफल नीचे रख दिए। उन्होंने कहा कि सड़क के बीच में ठेले लगाने पर कार्रवाई उचित है, लेकिन गलियों में किनारे कारोबार करने वाले गरीबों के खिलाफ इस तरह की कार्रवाई गलत है। इसी के विरोध में उन्होंने रिमूवल वाहन के सामने बैठकर प्रदर्शन किया।
वर्ष 2022 में हॉकर जोन बनाने के लिए पत्र देने का दावा
सोलंकी ने दावा किया कि उन्होंने वर्ष 2022 में हॉकर जोन बनाने के लिए महापौर, निगम आयुक्त और अपर आयुक्त को पत्र दिए थे। जनसुनवाई में आवेदन देने के बावजूद अब तक समाधान नहीं हुआ। उन्होंने गलियों में ठेले खड़े होने के प्रमाण के तौर पर सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने की बात भी कही।
अभिषेक उर्फ बबलू शर्मा ने की सख्त कार्रवाई की मांग
भाजपा पार्षद, एमआईसी सदस्य एवं जलकार्य समिति प्रभारी अभिषेक उर्फ बबलू शर्मा ने कहा कि विरोध करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन उसका तरीका तय होना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम ने बंगाली चौराहे के ब्रिज के नीचे और अन्नपूर्णा रोड पर हॉकर जोन बनाकर ठेला चालकों के व्यवस्थापन की व्यवस्था की है।
शर्मा ने सरकारी काम में बाधा डालने और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
रोजगार और अतिक्रमण का मुद्दा चर्चा में
नगर निगम की कार्रवाई के बाद गरीबों के रोजगार, हॉकर जोन की व्यवस्था और अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है। एक ओर ठेला चालकों के समर्थन में कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं, वहीं दूसरी ओर निगम के काम में बाधा डालने वालों के खिलाफ सख्ती की मांग की गई है।



