धार की भोजशाला को हाईकोर्ट ने वाग्देवी मंदिर माना, फैसले के बाद प्रशासन अलर्ट मोड पर, इंदौर-धार में सुरक्षा कड़ी
भोजशाला विवाद पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद धार और इंदौर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई।

जनोदय पंच। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। कई वर्षों पुराने विवाद में पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर सुनवाई के बाद दो जजों की बेंच ने फैसला सुनाया। फैसले के बाद धार और इंदौर प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार स्थित भोजशाला को वाग्देवी मंदिर मानते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। इस मामले में पांच याचिकाओं और तीन इंटरवेंशन पर विस्तृत सुनवाई हुई थी। सुनवाई पूरी होने के बाद दो जजों की बेंच ने फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे अब सुनाया गया। फैसले को देखते हुए धार और इंदौर जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है।
शुक्रवार होने के कारण संवेदनशीलता और बढ़ गई, क्योंकि इसी दिन मुस्लिम समाज भोजशाला परिसर में जुमे की नमाज अदा करता है। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और किसी भी अपुष्ट जानकारी को साझा नहीं करने की अपील की है। धार पुलिस कंट्रोल रूम में जिलेभर से करीब 1200 पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। एसपी सचिन शर्मा ने कंट्रोल रूम पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की और पुलिस बल को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि धार शहर की सुरक्षा 12 लेयर में की गई है। रिजर्व पुलिस बल और रैपिड एक्शन फोर्स को भी अलर्ट पर रखा गया है।
2022 में शुरू हुआ था मामला
यह विवाद वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने की मांग की गई थी। साथ ही नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार, परिसर में नमाज पर रोक, ट्रस्ट गठन और ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने की मांग भी शामिल थी।
सोशल मीडिया गतिविधियों पर प्रशासन की नजर
फैसले के बाद प्रशासन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मॉनिटरिंग बढ़ा दी है। भ्रामक जानकारी और अफवाह फैलाने वाले पोस्ट पर कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अपुष्ट खबरों पर विश्वास न करें और शांति व्यवस्था बनाए रखें।
कलेक्टर और एसपी ने की शांति बनाए रखने की अपील
धार कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने नागरिकों से आपसी सौहार्द और शांति बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने कहा कि गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
धार एसपी सचिन शर्मा ने भी सुरक्षा व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। पुलिस प्रशासन ने भोजशाला परिसर और शहर के विभिन्न क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए करीब 1500 पुलिसकर्मियों को लगाया गया है, जबकि संवेदनशील इलाकों में विशेष निगरानी रखी जा रही है।
ASI सर्वे और दोनों पक्षों के तर्क
वर्ष 2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का 98 दिनों तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी के अवसर पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी थी। हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली।
हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र बताया। उन्होंने ASI सर्वे, ऐतिहासिक दस्तावेज, शिलालेख और स्थापत्य अवशेषों का हवाला दिया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के ग्रंथ समरांगण सूत्रधार का उल्लेख करते हुए कहा कि भोजशाला की संरचना उसमें वर्णित मंदिर निर्माण मानकों से मेल खाती है।
वहीं मुस्लिम पक्ष ने तर्क दिया कि परिसर लंबे समय से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रहा है और धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने ASI सर्वे रिपोर्ट और सर्वे के दौरान उपलब्ध कराई गई तस्वीरों व वीडियोग्राफी की स्पष्टता पर सवाल उठाए।



