बड़वानी। आदर्श महाविद्यालय में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत व्याख्यान, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर हुआ विस्तृत मंथन
सोमनाथ को बताया आस्था, संस्कृति और स्वाभिमान का प्रतीक, वर्षभर चलेंगे विविध शैक्षणिक और सांस्कृतिक आयोजन

जनोदय पंच | बड़वानी। शासकीय आदर्श महाविद्यालय में सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत व्याख्यान आयोजित हुआ। डॉ. प्रमोद पंडित ने सोमनाथ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और प्राध्यापकों की सहभागिता रही तथा वर्षभर गतिविधियां आयोजित करने की जानकारी दी गई।
शासकीय आदर्श महाविद्यालय में आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग के निर्देशानुसार सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियां प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित के मार्गदर्शन में आयोजित की जा रही हैं। इसी क्रम में सोमनाथ संवाद व्याख्यानमाला का आयोजन हुआ, जिसमें ज्योतिर्लिंग परंपरा और मंदिर स्थापत्य की ऐतिहासिक परंपरा पर व्याख्यान आयोजित किया गया।
सोमनाथ का ऐतिहासिक महत्व
आध्यात्मिक अध्येता डॉ. प्रमोद पंडित ने कहा कि सोमनाथ 12 ज्योतिर्लिंग में प्रथम माना जाता है और गुजरात के प्रभास पाटन में स्थित यह मंदिर भारत की सभ्यता और निरंतरता का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि इसे कई बार आक्रमणों का सामना करना पड़ा, लेकिन आस्था और स्वाभिमान के बल पर पुनः स्थापित किया गया।

स्वाभिमान पर्व की अवधारणा
उन्होंने बताया कि सोमनाथ स्वाभिमान पर्व विनाश का नहीं, बल्कि सहनशीलता, विश्वास और आत्मसम्मान का प्रतीक है। आधुनिक काल में देवी अहिल्याबाई द्वारा पुनर्निर्माण और सरदार वल्लभभाई पटेल के नेतृत्व में 1951 में पुनः उद्घाटन का उल्लेख किया गया।सोमनाथ मंदिर के स्थापत्य, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण से जुड़े पहलुओं पर भी प्रकाश डाला गया। मंदिर में वर्षा जल संचयन, वर्मी कंपोस्ट और महिला रोजगार जैसी व्यवस्थाएं संचालित हैं।
आयोजन और सहभागिता
कार्यक्रम का संयोजन डॉ. अनिल पाटीदार द्वारा किया गया। उन्होंने बताया कि वर्षभर व्याख्यान, निबंध, क्विज, सांस्कृतिक कार्यक्रम और युवा सहभागिता अभियान आयोजित होंगे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों और प्राध्यापकों की उपस्थिति रही। अंत में आभार प्रो. आर. आर. मूवेल ने व्यक्त किया।



