लखीसराय में भगदड़ का बड़ा मामला, टेढ़े बिजली पोल के गिरने से मची अफरा-तफरी, 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत
लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में बिजली पोल गिरने के बाद करंट की अफवाह से भगदड़ मची

रमन बोरखड़े। जनोदय पंच। बिहार के लखीसराय स्थित अशोकधाम मंदिर में सोमवार सुबह भगदड़ से 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई। 12 से अधिक लोग घायल हुए। हादसे से पहले मंदिर के पास खेत में लगा 25 फीट ऊंचा बिजली का पोल दो दिनों से टेढ़ा था।
बिहार के लखीसराय के अशोकधाम मंदिर में सोमवार सुबह भगदड़ की घटना हुई। मंदिर से करीब एक किलोमीटर पहले और अशोकधाम हॉल्ट से 100 मीटर दूर खेत में सीमेंट का बिजली पोल लगा था। यह पोल पिछले दो दिनों से टेढ़ा होकर लटका हुआ था। इसी पोल के पास से मंदिर में दर्शन के लिए बैरिकेडिंग की गई थी। रात 12 बजे से श्रद्धालु इसी बैरिकेडिंग के रास्ते मंदिर की ओर जा रहे थे।
एक लाइन के बजाय 4-5 लाइनों में गुजर रहे थे श्रद्धालु
बैरिकेडिंग के रास्ते श्रद्धालु सिंगल लाइन में जाने के बजाय 4-5 लाइनों में आगे बढ़ रहे थे। सुबह करीब 6:30 बजे अचानक बिजली का पोल टूटकर खेत में गिर गया। पोल पर लगा तार कुछ लोगों के ऊपर गिरा। इसके बाद वहां करंट लगने की अफवाह फैल गई। अफवाह के बाद श्रद्धालु बचने के लिए भागने लगे।
भगदड़ में जमीन पर गिरे लोगों को भीड़ ने कुचला
अचानक भागने के दौरान कई श्रद्धालु जमीन पर गिर गए। इसके बाद पीछे से आ रही भीड़ उन्हें कुचलते हुए आगे बढ़ती रही। इस भगदड़ में 7 महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि 12 से अधिक लोग घायल हुए। घटना के बाद हादसे की परिस्थितियों को लेकर बिजली पोल की स्थिति और उसके आधार पर भी सवाल सामने आए।
25 फीट के पोल का बेस ढाई फीट गहराई में था
जिस पोल के गिरने के बाद करंट की अफवाह फैली, वह करीब 25 फीट लंबा और लगभग 150 किलो वजनी था। इसे मिट्टी वाली जमीन में करीब ढाई फीट गहराई तक गाड़ा गया था। जानकारी के अनुसार सीमेंट वाले पोल को ढाई से तीन फीट गहराई में गाड़ा जाता है, लेकिन उसके बेस को सीमेंट, मजबूत पत्थर और गिट्टियों से मजबूत बनाया जाता है, ताकि पोल लंबे समय तक स्थिर रहे।
गीली मिट्टी में पोल का बेस मजबूत नहीं किया गया
बिजली विभाग की ओर से खेत में सीमेंट का पोल लगाया गया था, लेकिन उसका बेस मजबूत नहीं किया गया। पोल को मिट्टी में ही गाड़ा गया था। इसके कारण पहले पोल बेंड हुआ और बाद में टूटकर गिर गया। खेत में धान की फसल के बीच पानी भी था। ऐसे में गीली मिट्टी के कारण उसकी पकड़ कमजोर होने की बात सामने आई। दी गई जानकारी के अनुसार, पोल लगाने के दौरान इस स्थिति का ध्यान नहीं रखा गया।



