नागपंचमी पर नागलवाड़ी शिखरधाम में 101 लीटर दूध से भिलट देव का अभिषेक, हजारों श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
रिमझिम बारिश और धुंध के बीच श्रद्धालुओं की भीड़, 108 व्यंजनों का भोग और महाआरती के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न

जनोदय पंच। नागलवाड़ी शिखरधाम में नागपंचमी पर भिलट देव का 101 लीटर दूध से अभिषेक हुआ। सुबह 4 बजे चोला श्रृंगार और महाआरती की गई। 108 व्यंजनों का भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं के लिए सुरक्षा और सुविधा के व्यापक इंतजाम किए गए।
निमाड़ के प्रसिद्ध नागलवाड़ी शिखरधाम में नागपंचमी पर्व पर भिलट देव मंदिर में विशेष धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए। ब्रह्म मुहूर्त में बाबा भिलट देव का 101 लीटर दूध से अभिषेक किया गया। इसके बाद चोला श्रृंगार कर महाआरती की गई। कातोर गादी भक्त मंडल की ओर से बाबा को 108 व्यंजनों का भोग लगाया गया। इसके बाद श्रद्धालुओं को प्रसादी वितरित की गई।

बारिश और धुंध के बीच पहुंचे श्रद्धालु
नागपंचमी पर्व को लेकर रविवार रात से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। करीब साढ़े तीन किलोमीटर लंबे पहाड़ी मार्ग पर वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित है। ऐसे में श्रद्धालु रिमझिम बारिश और धुंध के बीच पैदल पहाड़ी चढ़कर भिलट देव के दर्शन कर रहे हैं। सोमवार सुबह तक 60 हजार से अधिक श्रद्धालु मंदिर पहुंच चुके थे। नागपंचमी पर पांच लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है।

मंदिर के पट मंगलवार रात तक खुले
मंदिर के मुख्य पुजारी राजेंद्र बाबा ने बताया कि बाबा का 101 लीटर दूध से अभिषेक किया गया। ब्रह्म मुहूर्त में सुबह 4 बजे चोला श्रृंगार कर महाआरती हुई और 108 व्यंजनों का भोग लगाया गया। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह से मंगलवार रात 12 बजे तक मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए खुले रहेंगे।

मंदिर समिति और प्रशासन ने किए इंतजाम
मंदिर समिति के अध्यक्ष दिनेश यादव और कोषाध्यक्ष बजरंग गोयल ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए मंदिर समिति व प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। पुलिस के साथ मंदिर के स्वयंसेवक भी व्यवस्थाओं में तैनात हैं। मंदिर परिसर में 50 से अधिक सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जा रही है। श्रद्धालुओं को व्यवस्थित दर्शन कराने के लिए विशाल डोम शेड में कतारबद्ध कर मंदिर में प्रवेश दिया जा रहा है।


500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात
नागपंचमी पर्व को लेकर प्रशासन अलर्ट मोड पर है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए 500 से अधिक पुलिसकर्मी और 2 हजार से अधिक मंदिर समिति के स्वयंसेवक तैनात किए गए हैं। श्रद्धालुओं के लिए अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग, बैरिकेडिंग व लेन सिस्टम लागू किया गया है। यातायात व्यवस्था के लिए 5 पार्किंग स्थल और 3 ड्रॉप गेट बनाए गए हैं। भारी वाहनों के लिए रूट डायवर्जन लागू किया गया है। श्रद्धालुओं के लिए स्वच्छ पेयजल, चलित शौचालय, 24 घंटे मेडिकल टीम, एंबुलेंस और क्रेन की व्यवस्था भी की गई है।



