बड़वानी में किसानों का चक्काजाम, कलेक्टर कार्यालय का गेट बंद मिलने पर हाईवे पर खड़ी की ट्रैक्टर-ट्रॉलियां
कलेक्टर को ज्ञापन देने पहुंचे किसानों को गेट बंद मिला, बाद में एसडीएम को सौंपा ज्ञापन; 1 दिसंबर को बड़े आंदोलन की चेतावनी

जनोदय पंच। बड़वानी में मांगों को लेकर जिलेभर से किसान कृषि उपज मंडी में जुटे और सभा के बाद कलेक्टर कार्यालय पहुंचे। गेट बंद मिलने से नाराज किसानों ने हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर करीब 20 मिनट चक्काजाम किया। बाद में मांगों का ज्ञापन सौंपा।
मंडी में सभा के बाद कलेक्ट्रेट पहुंचे किसान
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले जिलेभर के किसान राजघाट रोड स्थित कृषि उपज मंडी में इकट्ठा हुए। मंडी में सभा के बाद किसान तख्तियां लेकर नारेबाजी करते हुए ट्रैक्टर-ट्रॉली और मोटरसाइकिल से कलेक्टर कार्यालय पहुंचे।
कलेक्ट्रेट कार्यालय का गेट बंद था और ज्ञापन लेने कोई अधिकारी नहीं आया। किसान कलेक्टर से मिलकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे, लेकिन गेट बंद होने के कारण वे अंदर नहीं जा सके। इससे किसानों में नाराजगी बढ़ गई।

हाईवे पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर किया चक्काजाम
नाराज किसानों ने नारेबाजी करते हुए कलेक्टर कार्यालय से नीचे आकर खंडवा-बड़ौदा स्टेट हाईवे और सेंधवा राष्ट्रीय राजमार्ग पर ट्रैक्टर-ट्रॉलियां खड़ी कर दीं। किसानों ने करीब 20 मिनट तक चक्काजाम किया और सड़क पर बैठकर शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। जाम के कारण कुछ देर तक यातायात प्रभावित रहा।

एसडीएम ने शासन स्तर पर मांगें भेजने का दिया आश्वासन
मौके पर एसडीएम भूपेंद्र सिंह रावत, तहसीलदार राहुल सोलंकी और पुलिस प्रशासन मौजूद था। एसडीएम भूपेंद्र सिंह रावत ने किसानों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगें जल्द ही शासन स्तर पर भेजी जाएंगी। हालांकि, किसान कुछ देर तक कलेक्टर को ही ज्ञापन देने की मांग पर अड़े रहे।
आखिर में किसानों ने एसडीएम भूपेंद्र सिंह रावत को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। एसडीएम भूपेंद्र सिंह रावत ने बताया कि किसानों ने प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा है, जिसे जल्द ही शासन स्तर पर भेजा जाएगा।
स्वामीनाथन रिपोर्ट से फसल मुआवजे तक मांगें
किसानों की मुख्य मांगों में स्वामीनाथन रिपोर्ट लागू करना, एमएसपी पर उपज खरीदना, खाद-बीज और कृषि सिंचाई सामग्री के दाम कम करना, नहरों में पानी छोड़ना, खराब नहरों की मरम्मत करना और अतिवृष्टि से खराब हुई फसलों का मुआवजा देना शामिल है।
1 दिसंबर को बड़े आंदोलन की चेतावनी
राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो 1 दिसंबर को जिला मुख्यालय पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा। महासंघ ने इसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होने की बात कही है।



