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सेंधवा में विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियों को लेकर सर्व आदिवासी समाज की बैठक, अधिकारों और विस्थापन के मुद्दों पर बनी रणनीति

9 अगस्त को अधिकार, अस्मिता और जल-जंगल-जमीन के संरक्षण का संकल्प, 18 जुलाई को होगी अगली रणनीतिक बैठक

जनोदय पंच। सेंधवा स्थित आदिवासी सामुदायिक भवन में विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियों को लेकर सर्व आदिवासी समाज की बैठक आयोजित की गई। बैठक में 9 अगस्त के आयोजन को ऐतिहासिक बनाने, अधिकारों की रक्षा, विस्थापन के विरोध और आगामी रणनीति तय करने पर विस्तृत चर्चा की गई।

सेंधवा स्थित आदिवासी सामुदायिक भवन में संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के ऐतिहासिक आयोजन को लेकर सर्व आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण एवं निर्णयात्मक बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता वरिष्ठ सामाजिक नेत्री श्रीमती सुमली बाई ने की। संचालन कनसिंग कनोजे एवं ई.आर. कलम अवाया ने किया, जबकि अंत में ईश्वर भुगवाड़े ने आभार व्यक्त किया। बैठक में समाज के विभिन्न संगठनों के पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, युवा और प्रबुद्धजन उपस्थित रहे तथा आयोजन को व्यापक स्वरूप देने पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।

अधिकार, अस्मिता और संरक्षण पर दिया गया जोर

बैठक में जानकारी दी गई कि संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा द्वारा 23 दिसंबर 1994 को पारित प्रस्ताव क्रमांक 49/214 के तहत प्रतिवर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जाता है। आदिवासी एकता परिषद के प्रदेश अध्यक्ष गजानन्द ब्राह्मणे ने कहा कि इस दिवस का उद्देश्य आदिवासी समाज के मानवाधिकारों की रक्षा, जल-जंगल-जमीन एवं खनिज संपदा पर अधिकारों का संरक्षण, अस्मिता, आत्मसम्मान, संस्कृति, इतिहास और अस्तित्व की सुरक्षा के साथ शिक्षा एवं स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि 9 अगस्त केवल पारंपरिक उत्सव का दिन नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा का संकल्प लेने का अवसर है।

बैठक में रखे गए प्रमुख प्रस्ताव

बैठक में 9 अगस्त को राष्ट्रीय अवकाश घोषित करने की मांग की गई। साथ ही खीवनी, ओंकारेश्वर, खंडवा तथा खरगोन के दगलखेड़ी सहित आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर हो रहे विस्थापन का कड़ा विरोध जताया गया। वक्ताओं ने कहा कि आदिवासियों को उनकी मूल भूमि से बेदखल करना स्वीकार नहीं किया जाएगा। आयोजन की रूपरेखा, जिम्मेदारियों के निर्धारण और आगामी रणनीति तय करने के लिए 18 जुलाई 2026 को पुनः बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया। समाज के सभी संगठनों, युवाओं और प्रबुद्धजनों से गांव-गांव जनजागरण कर 9 अगस्त को अधिकारों की आवाज के रूप में मनाने का आह्वान भी किया गया।

बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित

बैठक में प्रमुख रूप से सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी, गजानन्द ब्राह्मणे (प्रदेश अध्यक्ष, आदिवासी एकता परिषद), राहुल सोलंकी (जिला अध्यक्ष, मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद युवा प्रभाग), राजेश कनोजे, गेंदराम डावर, दूरसिंग डावर, सुनील नरगावे, श्रीमती दुर्गा जाधव, अमरसिंग दादा रोजानिमाल, मुकेश डूडवे, सुमली बाई खुटवाड़ी सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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