मुख्य खबरेसेंधवा

सेंधवा में भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्मोत्सव की धूम, जय कन्हैया लाल की से गूंजा पांडाल

सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान कृष्ण जन्मोत्सव का आयोजन भक्ति, उल्लास और धार्मिक उत्साह के साथ संपन्न हुआ।

जनोदय पंच। सेंधवा में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन भगवान कृष्ण जन्मोत्सव बड़े उत्साह और धार्मिक वातावरण में मनाया गया। महिलाओं ने अपने बच्चों को कृष्ण स्वरूप में सजाकर कार्यक्रम में शामिल किया। कथा के दौरान स्वामी प्रेमनंदनदास जी ने गुरु, संस्कार और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डाला। जन्मोत्सव पर पूरे पांडाल में भक्ति और उल्लास का माहौल रहा।

भागवत कथा के चौथे दिन व्यासपीठ पर विराजित स्वामी प्रेमनंदनदास जी ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि मनुष्य को दुनिया के सामने नहीं रोना चाहिए। यदि अपने दुखों की चर्चा करनी हो तो भगवान और गुरु के समक्ष करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शास्त्रों में ऐसे गुरु का वर्णन किया गया है जो भगवान से मिलन कराए और भवसागर से पार उतारने का मार्ग बताए। ऐसे गुरु का हाथ पकड़ना चाहिए।

स्वामी प्रेमनंदनदास जी ने ध्रुव कथा का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि जिस प्रकार ध्रुव की माता ने उन्हें श्रेष्ठ संस्कार दिए, उसी प्रकार प्रत्येक माता को अपने बच्चों में अच्छे संस्कारों का बीजारोपण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि ऐसे संस्कार भी आवश्यक हैं जो बच्चों को सद्मार्ग पर चलने और माता-पिता की सेवा करने के योग्य बनाएं।

मध्यरात्रि में मनाया गया कृष्ण जन्मोत्सव

कथा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण जन्म का अलौकिक प्रसंग सुनाया गया। वर्णन किया गया कि कंस के कारागार में दिव्य प्रकाश छा जाता है, लोहे की बेड़ियां स्वतः खुल जाती हैं और पहरेदार गहरी नींद में सो जाते हैं। उसी समय शंख, चक्र, गदा और पद्म धारण किए हुए स्वयं नारायण माता देवकी के समक्ष चतुर्भुज रूप में प्रकट होते हैं।

इसके बाद भगवान कृष्ण जन्मोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया गया। वासुदेव जी की झांकी के माध्यम से बाल रूप में भगवान कृष्ण को टोकरी में लेकर मंच तक लाया गया। जैसे ही झांकी मंच पर पहुंची, “नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” और “हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से पूरा पांडाल गूंज उठा। इस दौरान महिलाएं, पुरुष और बच्चे भक्ति भाव में झूम उठे। आयोजन में श्रद्धालुओं को चॉकलेट, खिलौने और गुब्बारे वितरित किए गए। अंत में माखन-मिश्री और लस्सी का प्रसाद वितरित किया गया।

पूर्णाहुति 9 जून को

आयोजन समिति के निलेश जैन ने बताया कि सात दिवसीय भागवत कथा की पूर्णाहुति 9 जून को होगी। इस दिन कथा का समय शाम 6 बजे से 8 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात पूर्णाहुति एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा।

कार्यक्रम में राजेंद्र रधुवंशी, अनिल वाद्य, कमल गुले, हिमांशु परसाई, भावेश वसानी, सतीश वाद्य, अमित व्यास, दीपक लालका, प्रवीण सोनी, विजय जैन, अशोक जैन, कीर्तिकांत गाधी, कमलेश पालीवाल, सचिन पाटिल, नितिन शर्मा, सोनू कानूनगो, योगेश मंडलोई, गजेंद्र गुप्ता, लवजी चावड़ा, महेश मित्तल, मुकेश मित्तल, राजेश सिंघानी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

 

Show More

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!