शिरपुर के आयोजन का हवाला देकर कांग्रेस कार्यकर्ता राकेश रावत ने भाजपा की आदिवासी नीति पर सवाल खड़े किए
राकेश रावत ने शिरपुर में भाजपा और युवा मोर्चा के आयोजन का हवाला देकर मध्यप्रदेश में विरोध पर सवाल उठाए।

जनोदय पंच। सामाजिक व कांग्रेस कार्यकर्ता राकेश रावत ने शिरपुर प्रवास के दौरान विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन का उल्लेख करते हुए मध्यप्रदेश में इसे लेकर उठने वाले सवालों पर चर्चा की। उन्होंने भाजपा नेताओं और सांसद से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के कथित अंतर को लेकर जवाब मांगा।
सामाजिक व कांग्रेस कार्यकर्ता राकेश रावत ने बताया कि शिरपुर प्रवास के दौरान उन्होंने विश्व आदिवासी दिवस का आयोजन देखा। उनके अनुसार, संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा घोषित विश्व आदिवासी दिवस को शिरपुर में भाजपा और भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ता उत्साह और सम्मान के साथ मना रहे थे। रावत ने कार्यक्रम के आयोजक एवं नगर सेवक सचिन सोनवाने से चर्चा का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, सचिन सोनवाने ने बताया कि शिरपुर के विधायक काशीराम दादा इस आयोजन के सभापति हैं।
आदिवासी पहचान को पार्टी से ऊपर बताया
राकेश रावत के अनुसार, आयोजन के संबंध में चर्चा के दौरान यह बात सामने आई कि आदिवासी समाज की पहचान, संस्कृति और अस्मिता को राजनीतिक दल से ऊपर माना गया। इसी आधार पर रावत ने मध्यप्रदेश में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर उठने वाले सवालों का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि यदि महाराष्ट्र में भाजपा के विधायक विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन का नेतृत्व कर सकते हैं, तो मध्यप्रदेश में इसे विदेशी एजेंडा क्यों बताया जाता है।

मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र को लेकर उठाए सवाल
राकेश रावत ने सवाल उठाया कि यदि महाराष्ट्र में विश्व आदिवासी दिवस सम्मान का विषय है, तो मध्यप्रदेश में आदिवासी युवाओं और आयोजकों पर मुकदमे क्यों दर्ज किए जाते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या आदिवासी दिवस महाराष्ट्र में सही और मध्यप्रदेश में गलत हो जाता है। उन्होंने भाजपा की आदिवासी नीति को लेकर भी सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या अलग-अलग राज्यों में इसके अलग-अलग मापदंड हैं या आदिवासी समाज को केवल वोट बैंक के रूप में देखा जाता है।
जवाब मांगने की अपील
रावत ने कहा कि देश एक है, संविधान एक है और आदिवासी समाज एक है, फिर आदिवासी दिवस को लेकर दोहरे मापदंड क्यों हैं। उन्होंने आदिवासी समाज के युवाओं से पहचान, संस्कृति और अधिकारों के सम्मान से जुड़े विषयों पर सवाल पूछने और जवाब मांगने की बात कही।



