इंदौर में ऐतिहासिक झांकियों के लिए कांग्रेस का सहयोग, मिल मजदूर समितियों को एक लाख रुपये की मदद
हुकुमचंद, स्वदेशी और राजकुमार मिल की झांकी समितियों को 25-25 हजार रुपये दिए, परंपरा के लिए स्थायी आर्थिक प्रावधान की मांग

जनोदय पंच। इंदौर में अनंत चतुर्दशी पर निकलने वाली ऐतिहासिक झांकियों के लिए कांग्रेस ने आर्थिक सहयोग दिया। मिल मजदूरों की झांकी समितियों को राशि वितरित की गई। इस दौरान झांकियों की परंपरा को कायम रखने के लिए सरकारी स्तर पर आर्थिक सहायता और स्थायी प्रावधान की मांग भी उठाई गई।
तीन मिलों की झांकी समितियों को सहायता
इंदौर शहर कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री और वरिष्ठ नेता सज्जन सिंह वर्मा, प्रदेश प्रवक्ता राजेश चौक, संभागीय प्रवक्ता अमित चौरसिया सहित कई कांग्रेसी नेता मालवा मिल पहुंचे। यहां हुकुमचंद मिल, स्वदेशी मिल और राजकुमार मिल के झांकी कलाकारों को 25-25 हजार रुपये की सहायता राशि का वितरण किया गया।
झांकियों की परंपरा को बनाए रखने की बात
कांग्रेस नेताओं ने झांकी निकालने वाली मिल मजदूर संस्थाओं और उनके परिवारों के परिश्रम, साहस और समर्पण को नमन किया। उन्होंने कहा कि वर्षों से मिलें बंद होने के बावजूद झांकियों की गौरवशाली परंपरा आज भी कायम है। नेताओं के मुताबिक झांकियों के निर्माण और आयोजन में बड़ी राशि खर्च होती है।
सज्जन सिंह वर्मा ने उठाई सरकारी सहायता की मांग
पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने कहा कि इंदौर की पहचान बन चुकी इस परंपरा को बचाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। वर्मा ने नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से झांकी समितियों को सरकारी स्तर पर आर्थिक सहायता दिलाने की मांग की।
वर्मा ने कहा कि कैलाश विजयवर्गीय की राजनीति अपने मिल मजदूर पिता के नाम से ही शुरू हुई थी, लेकिन उनके अनुसार कैलाश विजयवर्गीय आज अपने पिता के साथ काम करने वाले पूर्व मजदूरों को भूल चुके हैं। वर्मा ने कहा कि यदि वे चाहते तो इंदौर नगर निगम और इंदौर विकास प्राधिकरण से मिलकर सभी मिल मजदूरों को 10-10 लाख रुपये की सहायता राशि दिलवा सकते थे।
स्थायी आर्थिक प्रावधान की मांग
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नगर निगम, विकास प्राधिकरण और संबंधित विभागों के माध्यम से मिल मजदूरों की झांकियों के लिए स्थायी आर्थिक प्रावधान किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने संस्कृति विभाग से भी अनंत चतुर्दशी के झांकी जुलूस के लिए सहयोग उपलब्ध कराने की मांग उठाई।
इस दौरान नेताओं ने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जहां एक ओर बड़े आयोजनों और उत्सवों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, वहीं गरीब और मेहनतकश परिवारों की परंपराओं को भी आर्थिक सहारा मिलना चाहिए।



