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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर राष्ट्रीय नीति की मांग, भारत सरकार को भेजा गया अभ्यावेदन

सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन ने विभिन्न मंत्रालयों और प्रधानमंत्री कार्यालय से त्वरित कार्रवाई का किया आग्रह

जनोदय पंच। चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने और राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों तथा प्रधानमंत्री कार्यालय को रिट याचिका, न्यायालय के आदेश और अभ्यावेदन ई-मेल एवं स्पीड पोस्ट से प्रेषित किए हैं।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी पर रोक लगाने तथा इस विषय पर राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता एवं अधिवक्ता बी.एल. जैन ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुरूप भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालयों को अभ्यावेदन भेजा है। उन्होंने बताया कि सचिव सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, सचिव इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सचिव गृह मंत्रालय तथा सचिव दूरसंचार विभाग, भारत सरकार को रिट याचिका की प्रति, सुप्रीम कोर्ट के आदेश तथा अभ्यावेदन ई-मेल एवं स्पीड पोस्ट के माध्यम से प्रेषित किए गए हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री कार्यालय को भी पृथक रूप से आवेदन एवं शिकायत भेजी गई है।

जनहित याचिका और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी

बी.एल. जैन ने बताया कि इस विषय को लेकर उनके द्वारा सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी। सुनवाई के बाद न्यायालय ने अपने लिखित आदेश में कहा कि यह विषय निस्संदेह अत्यधिक सार्वजनिक महत्व का है। हालांकि न्यायालय ने यह भी कहा कि यह ऐसा कानूनी प्रश्न नहीं है, जिस पर निर्णय न्यायालय को करना हो। आदेश में उल्लेख किया गया कि यह मामला मुख्य रूप से तकनीकी प्रगति के उपयोग से संबंधित नीति का विषय है, जिस पर विशेषज्ञों और संबंधित अधिकारियों द्वारा विचार किया जाना चाहिए। इसी आधार पर याचिकाकर्ता को भारत सरकार के समक्ष रिट याचिका की प्रति के साथ अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की अनुमति प्रदान की गई।

त्वरित निर्णय लेने का किया अनुरोध

बी.एल. जैन ने अपने अभ्यावेदन में अनुरोध किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में इस जनहित के गंभीर विषय पर शीघ्र कार्रवाई करते हुए आवश्यक निर्णय लिया जाए। उन्होंने पत्र में उल्लेख किया कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में संबंधित अधिकारियों से आग्रह किया है कि याचिकाकर्ता द्वारा रिट याचिका में उठाए गए मुद्दों एवं सुझावों पर विचार किया जाए। न्यायालय ने यह भी कहा है कि उसे विश्वास है कि संबंधित अधिकारी इन सुझावों पर उचित विचार करेंगे।

समाज पर प्रभाव का किया उल्लेख

बी.एल. जैन ने कहा कि पोर्नोग्राफी की लत के कारण बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है तथा समाज और संस्कृति पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने अभ्यावेदन में उल्लेख किया कि महिलाओं, युवतियों और विशेषकर अबोध बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले यौन अपराधों में पोर्नोग्राफी की भूमिका का भी उल्लेख किया गया है। इसी आधार पर उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय से भी इस विषय में हस्तक्षेप कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।

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