सेंधवा में विश्व आदिवासी दिवस पर भव्य रैली, हजारों समाजजनों ने एकजुट होकर जल-जंगल-जमीन के अधिकारों की आवाज उठाई
चाचरिया से सेंधवा तक निकली रैली में पारंपरिक संस्कृति के साथ सामाजिक अधिकारों और समाज की एकता का संदेश दिया गया।

रमन बोरखड़े। सेंधवा। सेंधवा में विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज ने भव्य कार्यक्रम और विशाल रैली आयोजित की। विधायक मोंटू सोलंकी के नेतृत्व में समाजजन, युवा, महिलाएं, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए। रैली में जल-जंगल-जमीन, शिक्षा, रोजगार और अधिकारों को लेकर आवाज उठाई गई।
चाचरिया से सेंधवा तक निकली भव्य रैली
संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) द्वारा घोषित 9 अगस्त विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सेंधवा में आदिवासी समाज की ओर से भव्य कार्यक्रम एवं विशाल रैली का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाजजन, युवा, महिलाएं, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता शामिल हुए। रैली में पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदल और आदिवासी संस्कृति की झलक दिखाई दी। इस दौरान समाज की एकता, जल-जंगल-जमीन, शिक्षा, रोजगार और अधिकारों को लेकर नारे लगाए गए।

कार्यक्रम में शामिल होने से पहले सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी चाचरिया पहुंचे। यहां उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर नमन किया। इसके बाद मडगांव (चाचरिया फाटे) स्थित भगवान खाज्या नायक की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए। इसके बाद विधायक मोंटू सोलंकी हजारों समाजजनों और कार्यकर्ताओं के साथ भव्य काफिले एवं रैली के रूप में सेंधवा कार्यक्रम स्थल के लिए रवाना हुए। रास्ते में जगह-जगह समाजजनों ने रैली का स्वागत किया।

पूजा-अर्चना के साथ कार्यक्रम की शुरुआत
कार्यक्रम स्थल पर आदिवासी परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना एवं मंत्रोच्चार के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। इसके बाद आदिवासी महापुरुषों के छायाचित्रों पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, वन अधिकार, सामाजिक कुरीतियों, सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और आदिवासी संस्कृति एवं पहचान से जुड़े मुद्दों पर अपनी बात रखी।
सेंधवा विधायक मोंटू सोलंकी ने कहा कि 9 अगस्त केवल उत्सव मनाने का दिन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के इतिहास, संस्कृति, संघर्ष और अधिकारों को याद करने का दिन है। उन्होंने कहा कि समाज के महापुरुषों ने जल, जंगल, जमीन और समाज के सम्मान के लिए संघर्ष किया है। उन्होंने संस्कृति और परंपराओं को बचाते हुए शिक्षा, रोजगार, राजनीति और आर्थिक क्षेत्र में आगे बढ़ने की आवश्यकता बताई।

युवाओं की भूमिका और शिक्षा-रोजगार पर जोर
विधायक मोंटू सोलंकी ने कहा कि रैली और कार्यक्रम की सबसे बड़ी ताकत युवा रहे। उनके अनुसार युवाओं ने पिछले 8 दिनों से लगातार मेहनत कर कार्यक्रम को सफल बनाने में भूमिका निभाई। उन्होंने युवाओं से सामाजिक मुद्दों के साथ राजनीति में भी भागीदारी बढ़ाने की बात कही। शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर उन्होंने बेहतर शिक्षा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई।
जिला पंचायत सदस्य राजकला मोंटू सोलंकी ने महिला सशक्तिकरण पर कहा कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में आगे बढ़ने के समान अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने महिलाओं के साथ होने वाले अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाने और उनकी राजनीतिक एवं सामाजिक भागीदारी बढ़ाने का आह्वान किया।

मुकेश मामा ने जल-जंगल-जमीन और वन अधिकारों के प्रति समाज को जागरूक होने की बात कही। नारी शक्ति सुमलीबाई ने दहेज प्रथा को समाज के लिए चुनौती बताते हुए सामूहिक निर्णय की आवश्यकता बताई। उन्होंने लड़कों और लड़कियों के बीच भेदभाव समाप्त करने की बात कही।
सामाजिक मुद्दों पर वक्ताओं ने रखे विचार
जयस कार्यकारी अध्यक्ष राजू पटेल ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता की जरूरत बताते हुए जल जीवन मिशन सहित विभिन्न योजनाओं में अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग रखी। उन्होंने अन्याय और अत्याचार की स्थिति में समाज के एकजुट होकर साथ खड़े होने तथा बेरोजगार युवाओं के लिए स्थायी और सम्मानजनक रोजगार के अवसरों की बात कही।
जयस ब्लॉक अध्यक्ष एवं आदिवासी विकास परिषद युवा प्रभाग जिला अध्यक्ष राहुल सोलंकी ने मजदूरों के पलायन और शोषण का मुद्दा उठाया। उन्होंने कम मजदूरी पर बाहर जाने वाले मजदूरों और ठेकेदारों एवं बिचौलियों से जुड़ी परेशानियों का उल्लेख करते हुए नई पीढ़ी को शिक्षा और जागरूकता से मजबूत बनाने का आह्वान किया।
अनिल सस्त्या ने आदिवासी संस्कृति, भाषा और परंपराओं को बचाने की जिम्मेदारी बताई। दुरसिंग पटेल ने दहेज प्रथा पर सामूहिक निर्णय की आवश्यकता कही। विधायक प्रतिनिधि सुनील सोलंकी ने युवाओं से व्यापार, व्यवसाय और स्वरोजगार के क्षेत्र में आगे आने का आह्वान किया। देवा जाधव सहित अन्य वक्ताओं ने भी सामाजिक, राजनीतिक एवं जनहित के विभिन्न मुद्दों पर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम का संचालन विजय सोलंकी ने किया। इस अवसर पर विवेक मेहता, कलम अवाया, कानसिंग कनोजे, जितेंद्र डावर, प्रताप सेंगर (सरपंच प्रतिनिधि), सरदार नरगावे सहित बड़ी संख्या में समाजजन, युवा, महिलाएं और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
विश्व आदिवासी दिवस का संकल्प
कार्यक्रम में समाज की संस्कृति, परंपरा और पहचान की रक्षा, जल-जंगल-जमीन एवं संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूकता, बेटियों और युवाओं को आगे बढ़ाने तथा शिक्षा, संगठन और संघर्ष के माध्यम से समाज को मजबूत बनाने का संकल्प व्यक्त किया गया।
एक नजर
- 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर सेंधवा में भव्य कार्यक्रम हुआ।
- विधायक मोंटू सोलंकी के नेतृत्व में विशाल रैली निकाली गई।
- चाचरिया में भगवान बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया।
- मडगांव में भगवान खाज्या नायक की प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।
- रैली में युवा, महिलाएं, जनप्रतिनिधि और समाजजन शामिल हुए।
- शिक्षा, रोजगार, महिला सशक्तिकरण और वन अधिकारों पर चर्चा हुई।
- दहेज प्रथा, मजदूरों के पलायन और सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता के मुद्दे उठे।
- आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता को मजबूत बनाने का संकल्प लिया गया।



