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राजपुर में प्राकृतिक खेती कार्यशाला आयोजित, किसानों को प्राकृतिक होती अपनाने हेतु किया प्रेरित

बड़वानी;  विश्व पर्यावरण दिवस एवं अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के मध्य आयोजित जनकल्याणकारी गतिविधियों के अंतर्गत शुक्रवार को राजपुर के मांगलिक भवन में प्राकृतिक खेती विषयक कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का आयोजन आत्मा, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, जिला बड़वानी के निर्देशन में किया गया।

प्राकृतिक खेती कार्यक्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेरसिंह सोलंकी, लोकसभा सांसद श्री गजेन्द्रसिंह पटेल, पूर्व सांसद श्री सुभाष पटेल, जिला अध्यक्ष श्री अजय यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री बलवंत सिंह पटेल, किसान मोर्चा जिला अध्यक्ष श्री राजेन्द्र सिंह सितोले, मण्डल अध्यक्ष श्री कृष्णा धनगर एवं अन्य जनप्रतिनिधियों, कृषि सखियों, बीआरसी एवं कृषकों की सक्रिय भागीदारी रही। कार्यशाला में कुल 485 किसानों ने सहभागिता की, जिनमें विकासखण्ड बडवानी, पाटी, ठीकरी तथा राजपुर से किसान शामिल थे।

 

कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के प्रधान एवं प्रमुख वैज्ञानिक श्री डी.के. बडोदिया ने प्राकृतिक खेती के वैज्ञानिक पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि रासायनिक उर्वरकों एवं कीटनाशकों के निरंतर उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती जा रही है तथा भूमि कठोर बन रही है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती प्रमुख घटक बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, आच्छादन, वापसा, निमास्रत्र, ब्रहमास्त्र की विधि एवं उपयोग समझाये। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती से उत्पादन लागत में कमी आती है तथा मिट्टी की उर्वरता एवं पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। कार्यशाला के दौरान किसानों द्वारा किसानों ने कृषि वैज्ञानिक श्री डी. के. बडोदिया जी से विभिन्न विषयों पर चर्चा कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया और अपने अनुभव साझा किये। कार्यक्रम में विभाग द्वारा प्राकृतिक खेती प्रमुख घटक बीजामृत, जीवामृत, घनजीवामृत, निमास्रत्र, ब्रहमास्त्र एवं विभिन्न फसलो के बीज की प्रदर्शनी लगाई गयी थी।

लोकसभा सांसद श्री गजेन्द्रसिंह पटेल ने किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित करते हुए प्राकृतिक खेती का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल खेती की लागत कम करती है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण एवं स्वस्थ खाद्यान्न उत्पादन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है तथा पूर्व राज्यसभा सांसद डॉ. सुमेर सिंह सोलंकी ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर प्रकाश डालते हुए किसानों को मिट्टी की नियमित जांच कराने की सलाह दी। उन्होंने गोबर एवं कृषि अपशिष्टों का उचित प्रबंधन कर उनका उपयोग जैविक खाद एवं प्राकृतिक कृषि आदानों के रूप में करने पर जोर दिया।
उप संचालक कृषि ने उपस्थित किसानों एवं जनप्रतिनिधियों से कम से कम एक एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती प्रारंभ करने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने तथा कृषि को टिकाऊ एवं लाभकारी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कार्यक्रम के दौरान नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग अन्तर्गत प्राकृतिक खेती अपनाने वाले 10 किसानों को म.प्र. राज्य जैविक प्रमाणीकरण संस्था, भोपाल द्वारा जारी प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। साथ ही प्राकृतिक खेती में उत्कृष्ट कार्य करने वाले 05 किसानों को श्रीफल एवं शॉल भेंट कर सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त किसानों ने अपने अनुभव साझा करते हुए अन्य किसानों को भी प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों को रसायन मुक्त, कम लागत एवं टिकाऊ कृषि पद्धति अपनाने हेतु प्रोत्साहित करना था। अंत में उपस्थित किसानों से प्राकृतिक खेती को अधिक से अधिक क्षेत्र में अपनाने तथा अन्य कृषकों को भी इसके प्रति जागरूक करने आव्हान किया गया।

 

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