बड़वानी में रैगिंग पर सख्ती, शासकीय आदर्श महाविद्यालय ने शुरू किया जागरूकता अभियान
डॉ. प्रमोद पंडित बोले, महाविद्यालय परिसर रैगिंग के मामलों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर कर रहा कार्य

जनोदय पंच। बड़वानी के शासकीय आदर्श महाविद्यालय में सत्र 2026-27 के लिए एंटी रैगिंग जागरूकता अभियान चलाया गया। प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित, डॉ. बी. एस. मुजाल्दा और अन्य प्राध्यापकों ने विद्यार्थियों को रैगिंग के दुष्परिणाम, कानूनी प्रावधान और अनुशासन संबंधी जानकारी देते हुए रैगिंग मुक्त परिसर बनाए रखने का संदेश दिया।
विद्यार्थियों को दी रैगिंग संबंधी जानकारी
बड़वानी स्थित शासकीय आदर्श महाविद्यालय परिसर में आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग, म.प्र. शासन के निर्देशानुसार सत्र 2026-27 के लिए विद्यार्थियों हेतु एंटी रैगिंग जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि महाविद्यालय ऐसा स्थान है, जहाँ विद्यार्थी शिक्षा के साथ अपने व्यक्तित्व का विकास भी करते हैं। नए विद्यार्थियों का स्वागत प्रेम, सहयोग और सम्मान के साथ होना चाहिए, न कि डर और अपमान के साथ। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय परिसर रैगिंग के मामलों में जीरो टॉलरेंस पॉलिसी पर कार्य कर रहा है।

समिति ने बताए नियम और कानूनी प्रावधान
महाविद्यालय की एंटी रैगिंग समिति के संयोजक एवं वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. बी. एस. मुजाल्दा ने विद्यार्थियों को रैगिंग मुक्त परिसर और आंतरिक अनुशासन समिति संबंधी जानकारी दी। उन्होंने रैगिंग से जुड़े नियमों, कानूनी प्रावधानों और दुष्परिणामों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार की मानसिक या शारीरिक प्रताड़ना पूर्णतः प्रतिबंधित है तथा दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि सच्चा सीनियर वही है, जो जूनियर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन करे और उन्हें परिवार जैसा वातावरण प्रदान करे।
विद्यार्थियों ने लिया संकल्प
कार्यक्रम में डॉ. आकाश अस्के ने विद्यार्थियों को सकारात्मक एवं सहयोगात्मक वातावरण में अध्ययन करने के लिए प्रेरित किया तथा किसी भी समस्या की स्थिति में समिति से संपर्क करने की सलाह दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे और सभी ने रैगिंग मुक्त परिसर बनाए रखने का संकल्प लिया। इस अवसर पर डॉ. रेवाराम मंडलोई सहित अन्य प्राध्यापक उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन डॉ. गीतांजलि दासौंधी ने किया, जबकि आभार डॉ. दयाराम मुझालदा ने व्यक्त किया।



