सेंधवा से ग्यासपुर खेड़ी तक 75.5 किलोमीटर रेललाइन का टेंडर जारी, मनमाड़-इंदौर परियोजना को मिली नई गति
2,548.37 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से होगा निर्माण, चार साल में काम पूरा करने का लक्ष्य; रेल संघर्ष समिति ने जताया हर्ष

रमन बोरखड़े। जनोदय पंच। मनमाड़-इंदौर नई रेललाइन परियोजना के तहत मध्य रेलवे ने सेंधवा से धामनोद के ग्यासपुर खेड़ी तक 75.5 किलोमीटर लंबे रेलखंड के निर्माण के लिए टेंडर जारी किया है। परियोजना में सुरंग, पुल, ट्रैक, सिग्नलिंग और विद्युतीकरण के काम शामिल हैं।
2,548.37 करोड़ रुपए की लागत से बनेगा रेलखंड
मध्य रेलवे ने वणिहार (सेंधवा) से ग्यासपुर खेड़ी (धामनोद) के बीच 75.5 किलोमीटर लंबे नए रेलखंड के निर्माण के लिए इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मोड में टेंडर जारी किया है। इस पर मनमाड़-इंदौर रेल संघर्ष समिति ने हर्ष जताया है।
समिति के प्रमुख श्री मनोज मराठे ने बताया कि इस रेलखंड के निर्माण पर 2,548.37 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत आएगी। इसमें रेलवे लाइन के निर्माण के साथ सुरंगें, बड़े पुल, ट्रैक बिछाने, आधुनिक सिग्नलिंग और विद्युतीकरण के कार्य शामिल हैं। टेंडर दस्तावेजों के अनुसार निर्माण कार्य पूरा करने के लिए चार वर्ष की समय-सीमा निर्धारित की गई है।
मार्च 2027 में जमा होंगी निविदाएं
श्री मनोज मराठे ने बताया कि निविदा 30 अक्टूबर 2026 को जारी की गई है। पहली प्री-बिड बैठक 31 दिसंबर 2026 को होगी। बोली जमा करने की अंतिम तिथि 18 मार्च 2027 निर्धारित की गई है, जबकि तकनीकी बोलियां 19 मार्च 2027 को खोली जाएंगी।
अलग-अलग रेलखंडों में टेंडर जारी करने का सुझाव
समिति प्रमुख श्री मनोज मराठे ने बताया कि परियोजना का निर्माण समय पर पूरा करने और लागत में अनावश्यक वृद्धि रोकने के उद्देश्य से उन्होंने रेलवे अधिकारियों से पूरी परियोजना को तीन से चार भागों में बांटकर अलग-अलग डीपीआर तैयार करने और प्रत्येक खंड के लिए अलग टेंडर जारी करने का आग्रह किया था।
उन्होंने बताया कि समिति के सुझाव के अनुरूप अधिकारियों ने परियोजना को लगभग 75-75 किलोमीटर के अलग-अलग रेलखंडों में विभाजित कर डीपीआर तैयार करने और टेंडर प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में काम किया है। मराठे के अनुसार अलग-अलग खंडों में टेंडर जारी होने से निर्माण कार्य समानांतर रूप से आगे बढ़ सकेगा। इससे परियोजना को गति मिलने के साथ समय पर काम पूरा करने और लागत वृद्धि पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। उन्होंने इस पहल के लिए रेलवे अधिकारियों की सराहना की।
सुरंगों के क्षेत्रों में भूगर्भीय सर्वेक्षण
श्री मनोज मराठे ने CSIR-राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (CSIR-NGRI), हैदराबाद की भूभौतिकीय सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि धुले, सेंधवा, अबू घाटी और सिहोड़ (सुरंग-9 के निकट) क्षेत्रों में 29 ग्राउंड TEM सर्वेक्षण किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार अधिकतर सुरंगें उथले स्तर और बेसाल्ट चट्टानों से गुजरती हैं, जिससे जोखिम कम है। हालांकि, जल रिसाव वाली कमजोर चट्टानों पर विशेष तकनीकी ध्यान दिया जा रहा है।
वर्षों पुराने सपने को धरातल पर उतरने की उम्मीद
श्री मनोज मराठे ने परियोजना की प्रगति पर खुशी जताते हुए कहा कि महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के बीच कनेक्टिविटी मजबूत करने वाली यह रेललाइन व्यापार और यात्रा के लिहाज से महत्वपूर्ण साबित होगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के नागरिकों का वर्षों पुराना सपना अब धीरे-धीरे धरातल पर उतरता दिखाई दे रहा है। समिति परियोजना के प्रत्येक चरण और स्वीकृतियों पर आगे भी नजर रखेगी, ताकि निर्माण कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।



