सेंधवा

स्थानीय कारीगरों से दीपावली की खरीदारी कर अंतरसिंह आर्य ने दिया ‘वोकल फॉर लोकल’ का संदेश

मिट्टी के दीये, घोड़ा, डावा, पूजन सामग्री और रंगोली के रंग खरीदे, छोटे व्यापारियों का बढ़ाया उत्साह

सेंधवा । दीपावली का पर्व केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का ही नहीं, बल्कि स्थानीय कारीगरों, छोटे व्यापारियों और हस्तशिल्पकारों को प्रोत्साहित करने का भी अवसर है। इसी उद्देश्य से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘वोकल फॉर लोकल’ के आह्वान को जन-जन तक पहुंचाने के लिए राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतरसिंह आर्य ने शुक्रवार को सेंधवा नगर के किले अंदर लगी दुकानों से दीपावली की खरीदारी की। उन्होंने स्थानीय हस्तशिल्पकारों से मिट्टी के दीये, मिट्टी का घोड़ा एवं डावा खरीदा। इसके साथ ही पूजन के लिए झाड़ू तथा घर में रंगोली सजाने के लिए विभिन्न रंगों के रंग भी खरीदे। इस दौरान उन्होंने स्थानीय छोटे व्यापारियों और कारीगरों से चर्चा कर उनका उत्साहवर्धन किया।

भाजपा प्रवक्ता सुनील अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीपावली पर्व के अवसर पर देशवासियों से आह्वान किया है कि वे स्थानीय फुटकर व्यापारियों, छोटे दुकानदारों और स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं की खरीदारी को प्राथमिकता दें। इससे स्थानीय व्यापार को बढ़ावा मिलेगा और वर्षों से पारंपरिक हस्तशिल्प एवं मिट्टी के उत्पाद बनाने वाले कारीगरों को आर्थिक संबल मिलेगा। प्रधानमंत्री के इसी संदेश को आत्मसात करते हुए अंतरसिंह आर्य ने स्थानीय दुकानों से दीपावली की सामग्री खरीदकर ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान का संदेश दिया।

इस अवसर पर अंतरसिंह आर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आत्मनिर्भर भारत का सपना तभी साकार होगा, जब देश का प्रत्येक नागरिक स्वदेशी उत्पादों को अपनाने और उन्हें प्रोत्साहित करने का संकल्प लेगा। हमारे स्थानीय कारीगर और छोटे व्यापारी अपनी मेहनत एवं हुनर से अनेक उपयोगी और पारंपरिक वस्तुओं का निर्माण करते हैं। यदि हम त्योहारों पर इनसे खरीदारी करेंगे तो न केवल उनका आर्थिक विकास होगा, बल्कि उनकी कला और पारंपरिक विरासत भी सुरक्षित रहेगी।

उन्होंने कहा कि भारत को विकसित और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को स्वदेश में निर्मित उत्पादों को प्राथमिकता देनी होगी। हमें अपनी छोटी-छोटी खरीदारी के माध्यम से स्थानीय व्यापारियों और कारीगरों के चेहरे पर मुस्कान लाने का प्रयास करना चाहिए। स्थानीय उत्पादों को अपनाना ही देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।आर्य की इस पहल से स्थानीय दुकानदारों और हस्तशिल्पकारों में भी उत्साह देखने को मिला। दीपावली जैसे बड़े पर्व पर स्थानीय उत्पादों की खरीदारी का यह संदेश अन्य लोगों को भी स्वदेशी वस्तुएं अपनाने और छोटे व्यापारियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करेगा।

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