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एआई और मशीन लर्निंग कार्यशाला में युवाओं को मिला तकनीकी कौशल का प्रशिक्षण

कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने कहा व्यक्तिगत क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल कर कौशल विकास के माध्यम से समाज और राष्ट्र के उत्थान में दें योगदान

बड़वानी जिला प्रशासन बड़वानी के सौजन्य से प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस, शहीद भीमा नायक शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बड़वानी में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) एवं मशीन लर्निंग पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जिले के युवाओं और विद्यार्थियों को तेजी से विकसित हो रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता तकनीक की मूल अवधारणाओं, व्यावहारिक उपयोग, रोजगार एवं नवाचार की संभावनाओं से परिचित कराना था। कार्यशाला में कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह एवं महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य तथा गणमान्यजन श्री अजय यादव ने उद्बोधन दिया। विशेषज्ञ प्रशिक्षक के रूप में एसजीएसआईटीएस, इंदौर के डॉ. उपेंद्र सिंह ने लगभग दो घंटे तक एआई एवं मशीन लर्निंग के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया। इस अवसर संयुक्त कलेक्टर श्री रवि वर्मा सहित विद्यार्थी उपस्थित थे। आयोजन व्यवस्था स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ द्वारा की गई।

कलेक्टर श्रीमती जयति सिंह ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक युवा को अपने व्यक्तिगत क्षेत्र में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए निरंतर अपने कौशल का विकास करना होगा। नई तकनीकों को समझना और उनका रचनात्मक उपयोग करना आज की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कौशल उन्नयन केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका उपयोग समाज और राष्ट्र के उत्थान में भी होना चाहिए। युवाओं को अपनी क्षमता पहचानकर नए ज्ञान, तकनीक और कौशल के साथ आगे बढ़ने का प्रयास करना चाहिए।

गणमान्यजन श्री अजय यादव ने विद्यार्थियों को लक्ष्य पर केंद्रित रहने की प्रेरणा देते हुए अर्जुन का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि लक्ष्य निर्धारित करने के बाद व्यक्ति को अपना ध्यान भटकने नहीं देना चाहिए। जिस प्रकार अर्जुन ने अपने लक्ष्य पर एकाग्र होकर सफलता प्राप्त की, उसी प्रकार विद्यार्थियों को भी अपने जीवन के उद्देश्य और लक्ष्य के प्रति निरंतर केंद्रित रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक के दौर में एआई जैसी नई विधाओं को सीखने के साथ-साथ विद्यार्थियों में लक्ष्य के प्रति एकाग्रता, सीखने की इच्छा और निरंतर प्रयास की भावना भी आवश्यक है।
प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य ने अपने उद्बोधन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के विकास के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए इसकी उपयोगिता को समझाया। उन्होंने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास लंबे समय में विभिन्न चरणों से होकर वर्तमान स्वरूप तक पहुंचा है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीकी बदलावों को समझने और शिक्षा के साथ नई तकनीकों को जोड़ने का आह्वान किया।

एआई को समझने से लेकर उसके व्यावहारिक उपयोग तक प्रशिक्षण
विशेषज्ञ प्रशिक्षक डॉ. उपेंद्र सिंह, असिस्टेंट प्रोफेसर, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग, श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस, इंदौर ने लगभग दो घंटे तक विद्यार्थियों को विस्तृत प्रशिक्षण दिया। उन्होंने एआई और मशीन लर्निंग को सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाते हुए बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का व्यापक उद्देश्य ऐसी मशीनों का विकास करना है जो सामान्यतः मानवीय निर्णय और समझ की आवश्यकता वाले कार्य कर सकें। मशीन लर्निंग एआई का ऐसा मार्ग है जिसमें मशीन को उदाहरणों एवं आंकड़ों से पैटर्न सीखने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। प्रशिक्षण सामग्री में एआई, मशीन लर्निंग और डीप लर्निंग के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया गया।

उन्होंने बताया कि आज विद्यार्थी अपने दैनिक जीवन में कई प्रकार से एआई का उपयोग कर रहे हैं। मोबाइल में चेहरा पहचानना, सोशल मीडिया पर पसंद के अनुसार सामग्री सुझाना, मानचित्र के माध्यम से मार्ग बताना, बैंकिंग में संदिग्ध लेन-देन की पहचान करना, स्पैम संदेशों को अलग करना तथा आवाज को टेक्स्ट में बदलना इसके सामान्य उदाहरण हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि एआई कोई जादुई प्रक्रिया नहीं है, बल्कि आंकड़ों और उदाहरणों से सीखने वाली तकनीक है।

प्रशिक्षण के दौरान मशीन लर्निंग की कार्यप्रणाली, प्रशिक्षण एवं परीक्षण, डेटा की गुणवत्ता, मॉडल की त्रुटियां, न्यूरल नेटवर्क, कंप्यूटर विजन तथा एआई के जिम्मेदार उपयोग जैसे विषयों को भी समझाया गया। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग में अच्छे परिणाम के लिए गुणवत्तापूर्ण डेटा अत्यंत महत्वपूर्ण है। केवल सटीकता के आधार पर किसी मॉडल की सफलता तय नहीं की जा सकती, बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में उसके प्रदर्शन का परीक्षण भी आवश्यक है।
स्वास्थ्य, कृषि, सुरक्षा और स्मार्ट सिटी में एआई का उपयोग
डॉ. सिंह ने एआई के व्यावहारिक उपयोगों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए बताया कि स्वास्थ्य के क्षेत्र में रोगों की प्रारंभिक पहचान, कृषि में फसल रोगों की पहचान, उत्पादन का अनुमान एवं सिंचाई प्रबंधन, वित्तीय क्षेत्र में धोखाधड़ी की पहचान, स्मार्ट सिटी में यातायात प्रबंधन, शिक्षा में व्यक्तिगत सीखने की व्यवस्था तथा सुरक्षा के क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की पहचान में इसका उपयोग किया जा रहा है।
उन्होंने विशेष रूप से अपने शोध एवं परियोजनाओं के उदाहरणों के माध्यम से विद्यार्थियों को बताया कि स्थानीय समस्याओं के समाधान के लिए भी एआई का उपयोग किया जा सकता है। प्रशिक्षण सामग्री में योग प्रशिक्षक, मस्तिष्क की एमआरआई छवियों से ट्यूमर पहचान, त्वचा संबंधी छवियों का विश्लेषण, वीडियो में हिंसक गतिविधियों की पहचान, सड़क यातायात विश्लेषण, गन्ने एवं टमाटर की फसल में रोग पहचान, ड्रोन के माध्यम से पेड़ों की गणना, सौर पैनलों की स्थिति पहचान तथा कचरे के वर्गीकरण जैसे उदाहरण शामिल रहे।
विद्यार्थियों को नवाचार और शोध की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश
डॉ. उपेंद्र सिंह ने विद्यार्थियों को एआई सीखने के लिए व्यावहारिक दिशा भी बताई। उन्होंने चार सप्ताह की प्रारंभिक योजना के अंतर्गत पाइथन की मूलभूत जानकारी, पहला मशीन लर्निंग मॉडल, इमेज क्लासिफायर तथा अपने आसपास की किसी स्थानीय समस्या पर आधारित परियोजना तैयार करने की प्रक्रिया समझाई। उन्होंने विद्यार्थियों को उपलब्ध निःशुल्क तकनीकी साधनों का उपयोग करते हुए छोटे प्रयोगों से शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया।
उन्होंने कहा कि किसी स्थानीय समस्या की पहचान कर उसके समाधान के लिए डेटा एकत्र करना, मॉडल तैयार करना, उसका परीक्षण करना और परिणामों का ईमानदारी से मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को विचार से शोध-पत्र, पेटेंट और उत्पाद तक की यात्रा के बारे में भी जानकारी दी गई। इससे विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि एआई केवल जानकारी प्राप्त करने की तकनीक नहीं, बल्कि समस्या समाधान, शोध, नवाचार और उद्यमिता का माध्यम भी बन सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान एआई के लाभों के साथ उसकी सीमाओं पर भी चर्चा की गई। डेटा में पक्षपात, गोपनीयता, गलत परिणाम, नई परिस्थितियों में मॉडल की विफलता तथा मानवीय निर्णय की आवश्यकता जैसे विषयों को रेखांकित करते हुए जिम्मेदार एआई के उपयोग पर जोर दिया गया। प्रशिक्षक ने स्पष्ट किया कि तकनीक को मानव निर्णय का सहयोगी बनाना चाहिए तथा महत्वपूर्ण निर्णयों में मानवीय निगरानी आवश्यक है।
कार्यशाला के अंत में डॉ. सपना सोनी ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन भोलू बामनिया, डॉ. श्याम नाईक एवं डॉ. मधुसूदन चौबे ने किया। आयोजन में आरती धनगर, हंसा धनगर एवं जोया खान ने सहयोग प्रदान किया। कार्यशाला के माध्यम से विद्यार्थियों को एआई एवं मशीन लर्निंग की बुनियादी समझ के साथ इसके व्यावहारिक उपयोग, शोध, नवाचार और भविष्य के कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई।

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