भागवत कथा में कंस वध और रुक्मिणी विवाह का प्रसंग, श्रद्धालुओं ने निकाली बारात
स्वामी प्रेमानंदनदास जी ने श्रीकृष्ण की मथुरा लीला और रुक्मिणी हरण का भावपूर्ण वर्णन किया, कथा में भव्य विवाह उत्सव भी आयोजित हुआ

जनोदय पंच। सेंधवा की तिरुपति कॉलोनी में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के छठवें दिन स्वामी प्रेमानंदनदास जी ने कंस वध और श्रीकृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का विस्तृत वर्णन किया। कथा स्थल पर प्रतीकात्मक विवाह उत्सव, बारात और सम्मान समारोह आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए।
कंस वध का प्रसंग सुनाया
तिरुपति कॉलोनी में आयोजित कथा के दौरान स्वामी प्रेमानंदनदास जी ने बताया कि मथुरा पहुंचते ही श्रीकृष्ण ने कुवलयापीड हाथी का वध किया और रंगशाला में प्रवेश के बाद चाणूर तथा मुष्टिक जैसे महाबली पहलवानों को परास्त कर दिया। अपने योद्धाओं की हार देखकर कंस भयभीत हो उठा और उसने सैनिकों को कृष्ण-बलराम को मारने तथा वासुदेव-उग्रसेन को कारागार में डालने का आदेश दिया।

स्वामी प्रेमानंदनदास जी ने कहा कि श्रीकृष्ण तत्काल कंस के राजसिंहासन तक पहुंचे, उसे नीचे गिराकर उसका वध कर दिया। इसके बाद देवकी और वासुदेव को कारागार से मुक्त कराया तथा उग्रसेन को उनका राज्य वापस सौंपा। कथा के दौरान श्रद्धालु बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
रुक्मिणी विवाह का वर्णन
कथा में रुक्मिणी विवाह प्रसंग को प्रेम और समर्पण का प्रतीक बताते हुए स्वामी प्रेमानंदनदास जी ने कहा कि विदर्भराज भीष्मक की पुत्री रुक्मिणी श्रीकृष्ण को पति रूप में स्वीकार कर चुकी थीं। उन्होंने एक ब्राह्मण के माध्यम से श्रीकृष्ण को संदेश भेजकर अपनी रक्षा की प्रार्थना की।

उन्होंने बताया कि रुक्मी ने रुक्मिणी का विवाह शिशुपाल से तय कर दिया था, जिसके बाद श्रीकृष्ण द्वारका से विदर्भ पहुंचे। विवाह के दिन मंदिर से लौटती रुक्मिणी को श्रीकृष्ण रथ पर बैठाकर द्वारका ले गए। कथा स्थल पर इसी प्रसंग के अनुरूप प्रतीकात्मक विवाह उत्सव आयोजित किया गया। कृष्ण घोड़े पर विराजित रहे और ढोलक की थाप पर बारातियों ने नृत्य किया।
सम्मान समारोह भी हुआ
कार्यक्रम के दौरान मानव सेवा समिति, सुभाषचंद बोस रक्तदान समिति और श्री बालाजी ग्रुप की ओर से कथा वाचक प्रेमानंदनदास जी का शाल एवं माला पहनाकर अभिनंदन किया गया। आयोजन परिवार के भाईलाल भाई पटेल का भी सम्मान किया गया।

इस अवसर पर बालाजी ग्रुप के डॉ लालका, निलेश जैन, मोहन चौहान, बापू काका, अमर शर्मा, राजेश पालीवाल, राजेंद यादव, पियूष शाह, राजेश चावला, मनीष शर्मा, चंद्रेश वसानी, मुकेश शर्मा, मनोज गुप्ता, विशाल कुमरावत, मनोज पटेल और गोवर्धन वर्मा सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।



