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सेंधवा में राधा अष्टमी उत्सव में सजी राधा-कृष्ण नौका विहार झांकी, 56 भोग और गोपी रास ने मोहा मन, 151 फीट चुनरी से गौ माता का श्रृंगार

अग्रवाल समाज महिला मंडल एवं बहू-बेटी मंडल का आयोजन, राधा नाम संकीर्तन के साथ महिलाओं ने निभाई धार्मिक परंपराओं में सहभागिता

जनोदय पंच। सेंधवा में राधा अष्टमी के अवसर पर पहली बार भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन किया गया। राधा-कृष्ण गोशाला में हुए उत्सव में गौ माता का 151 फीट लंबी चुनरी से श्रृंगार, 56 भोग अर्पण, गोपी रास और नौका विहार झांकी आकर्षण का केंद्र रही।

151 फीट चुनरी से गौ माता का श्रृंगार

सेंधवा में अग्रवाल समाज महिला मंडल एवं बहू-बेटी मंडल द्वारा राधा अष्टमी के पावन अवसर पर पहली बार भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन किया गया। स्थानीय राधा-कृष्ण गोशाला में आयोजित उत्सव में समाज की महिलाओं, बहू-बेटियों एवं समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पूरे आयोजन के दौरान राधा-कृष्ण भक्ति से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

आयोजन के दौरान गौ माता को 151 फीट लंबी चुनरी ओढ़ाकर विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके बाद गौ माता को अन्नकूट प्रसाद के रूप में 56 भोग अर्पित किए गए। समाज की बहू-बेटियों ने गोपी रास की प्रस्तुति भी दी, जिसने उपस्थित श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।

राधा अष्टमी के महत्व की दी जानकारी

अग्रवाल समाज महिला मंडल अध्यक्ष सपना गोयल एवं सचिव रितु गोयल ने बताया कि राधा अष्टमी राधा रानी के प्राकट्य का पावन उत्सव है, जो भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि राधा रानी की कृपा के बिना भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति संभव नहीं है। राधा नाम का स्मरण करने मात्र से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं।

उन्होंने बताया कि इस दिन श्रद्धा एवं भक्ति के साथ व्रत-पूजन करने से घर में सुख, शांति एवं समृद्धि आती है तथा जीवन के कष्ट दूर होते हैं। धार्मिक ग्रंथों में राधा रानी के प्राकट्य का विशेष वर्णन मिलता है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार राधा रानी माता के गर्भ से जन्म लेकर नहीं आईं, बल्कि भाद्रपद शुक्ल अष्टमी को मध्याह्न के समय बरसाना में वृषभानु जी के प्रांगण में स्वर्ण कमल पर प्रकट हुई थीं। इसी प्राकट्य उत्सव की स्मृति में राधा अष्टमी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती है।

राधा-कृष्ण की नौका विहार झांकी रही आकर्षण

आयोजन में राधा-कृष्ण की नौका विहार की सुंदर एवं मनमोहक झांकी विशेष आकर्षण का केंद्र रही। पानी के कुंड में सुंदर नाव सजाकर भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा रानी के नौका विहार का जीवंत दृश्य प्रस्तुत किया गया। महिलाओं ने हाथों से नाव को तल्ला देकर राधा-कृष्ण को नौका विहार करवाया। झांकी ने उपस्थित महिलाओं एवं श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।

उत्सव के अंतर्गत गौ माता को चुनरी मनोरथ एवं अन्नकूट का भोग अर्पित किया गया। साथ ही ठाकुर श्रीनाथजी को छप्पन भोग लगाया गया। महिलाओं ने रमण रेती खेल उत्सव का भी आनंद लिया।

राधा नाम संकीर्तन से भक्तिमय हुआ परिसर

कार्यक्रम की विशेषता रही कि समाज की महिलाओं एवं बहू-बेटियों ने श्री राधा जी का रूप धारण कर भक्ति एवं श्रद्धा के साथ राधा नाम का जप और संकीर्तन किया। भजन-कीर्तन एवं धार्मिक आयोजन के बीच पूरा परिसर राधा-कृष्ण की भक्ति में सराबोर नजर आया। महिलाओं ने सामूहिक रूप से धार्मिक उत्सव में सहभागिता कर समाज की एकता और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत किया।

आयोजन में समाजजनों ने निभाई सहभागिता

कार्यक्रम के सफल आयोजन में अग्रवाल समाज महिला मंडल की अध्यक्ष सपना गोयल, सचिव रितु गोयल, रजनी तायल, किरण तायल, संतोष चोमूवाला, मीना चोमूवाला, सुशीला सिंघल, निर्मला मंगल सहित समस्त कार्यकारिणी एवं बहू-बेटी प्रभारियों का विशेष सहयोग रहा।

वहीं राधा सप्त सखी मंडल की अंकिता चोमूवाला, शैली खंडेलवाल, श्वेता दीवान, तृप्ति मित्तल, गरिमा गोयल, कनिका खंडेलवाल एवं जया खंडेलवाल ने कार्यक्रम की विभिन्न व्यवस्थाओं एवं प्रस्तुतियों को सुंदर रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

आयोजन में अग्रवाल समाज अध्यक्ष राजेंद्र नरेडी सहित कैलाश एरन, दीपक गर्ग, संजय गोयल, राजकुमार मंगल, विजेंद्र अग्रवाल, मुकेश अग्रवाल, अर्पित तायल एवं सुनील अग्रवाल सहित समाज के अनेक समाजजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान सभी ने धार्मिक आयोजन की सराहना करते हुए इसे समाज की महिलाओं एवं बहू-बेटियों द्वारा भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपरा और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करने वाला अभिनव प्रयास बताया।

 

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