सेंधवा में देहदान के संकल्प से बढ़ी जागरूकता, 84 वर्षीय मां और 32 वर्षीय बेटे ने भरा संकल्प पत्र
स्वर्गीय इंदिरा शर्मा के देहदान से प्रेरित होकर कोकिकाबाई महाजन और पुत्र सचिन ने लिया मरणोपरांत देहदान का निर्णय, मानव सेवा समिति ने किया सम्मानित

रमन बोरखड़े। जनोदय पंच। सेंधवा में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ रही है। गुरुवार को मां और बेटे ने मृत्यु के बाद देहदान करने का संकल्प लिया। मानव सेवा समिति की प्रेरणा से दोनों ने संकल्प पत्र भरा। समिति ने सम्मान पत्र देकर उन्हें सम्मानित किया।
स्वर्गीय इंदिरा शर्मा द्वारा देहदान का निर्णय लेने के बाद सेंधवा नगर में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है। उनके इस निर्णय ने समाज में मानवता की नई अलख जगाई है। इसी से प्रेरित होकर मानव सेवा समिति, सेंधवा के माध्यम से दो और लोगों ने मरणोपरांत देहदान का संकल्प लिया।
मां-बेटे ने भरा देहदान का संकल्प पत्र
29 अक्टूबर 2026, गुरुवार को माली समाज की सेंधवा निवासी नालेपार क्षेत्र की कोकिकाबाई रघुनाथ महाजन, उम्र 84 वर्ष, और उनके 32 वर्षीय पुत्र सचिन रघुनाथ महाजन ने मृत्यु के बाद देहदान करने का संकल्प लिया। दोनों ने अपना संकल्प पत्र नगरपालिका उपाध्यक्ष मोहन जोशी तथा मानव सेवा समिति के नीलेश जैन, महेंद्र परिहार, अशोक जैन और पंकज शाह की मौजूदगी में भरा।
मानव सेवा समिति ने सम्मान पत्र देकर किया सम्मानित
देहदान का संकल्प लेने वाले मां-बेटे को मानव सेवा समिति ने सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। समिति के नीलेश जैन ने बताया कि इंदिरा शर्मा का निर्णय केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।
मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान में देहदान का महत्व
नीलेश जैन ने कहा कि देहदान सबसे बड़ा दान है, जिससे मेडिकल शिक्षा और अनुसंधान को नई दिशा मिलती है। संकल्प लेने वाले परिजनों ने कहा कि इंदिरा शर्मा ने उन्हें यह सीख दी कि मृत्यु के बाद भी समाज के काम आया जा सकता है। नगर में इस पहल की सराहना हो रही है।



