सेंधवा; इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन सर्वे पर विवाद, आदिवासी किसान ने नियमों की अनदेखी और दस्तावेज नहीं देने के आरोप लगाए
ग्राम बनिहार के किसान ने पूर्व सूचना के बिना सर्वे करने पर जताई आपत्ति, अनुविभागीय अधिकारी से शिकायत कर जांच की मांग करेंगे

जनोदय पंच। सेंधवा तहसील में इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के भूमि सर्वे को लेकर विवाद सामने आया है। एक किसान ने रेलवे और राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों पर पूर्व सूचना नहीं देने तथा सर्वे आदेश की लिखित प्रति उपलब्ध नहीं कराने का आरोप लगाया है।

भूमि सर्वे को लेकर किसान ने उठाए सवाल
सेंधवा, जिला बड़वानी। 29 अक्टूबर 2026। ग्राम बनिहार (बारद्वारी) के किसान पोरलाल खर्ते ने इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के लिए भूमि सर्वे एवं अधिग्रहण की प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाया है। किसान के अनुसार, ग्राम बनिहार में उनकी कृषि भूमि है, जिसका सर्वे क्रमांक 2/6/1 है। इस भूमि के कुछ हिस्से को रेल लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहित किए जाने संबंधी सूचना दैनिक समाचार पत्र में प्रकाशित हो चुकी है।
पटवारी के फोन के बाद सर्वे की सूचना पर आपत्ति
पोरलाल खर्ते के अनुसार, 29 अक्टूबर 2026 को सुबह लगभग 9 बजे पटवारी आशा गवले का उनके मोबाइल पर फोन आया। उन्हें बताया गया कि राजेश एवं रेलवे विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उनकी भूमि के सर्वे के लिए आने वाले हैं। किसान ने सवाल उठाया कि सर्वे की सूचना नियमानुसार पहले क्यों नहीं दी गई। उनके अनुसार, पटवारी ने जवाब दिया कि रेलवे विभाग ने उन्हें भी इसकी जानकारी एक दिन पहले ही दी थी।
किसान ने बताया कि इससे पहले भी सर्वे के लिए आने पर उन्हें केवल मोबाइल फोन से सूचना दी गई थी और सुबह 10 बजे मौके पर उपस्थित रहने को कहा गया था, जबकि संबंधित अधिकारी-कर्मचारी दोपहर लगभग 2 बजे पहुंचे थे।
आदेश की लिखित प्रति देने से इनकार करने का आरोप
किसान के मुताबिक, मौके पर उपस्थित रेलवे एवं राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों से सर्वे संबंधी आदेश की प्रति मांगी गई, तो उन्होंने मोबाइल फोन पर आदेश दिखाया, लेकिन उसकी लिखित प्रति देने से इनकार कर दिया। किसान ने मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता तथा भूमि अधिग्रहण और रेलवे परियोजना से संबंधित लागू नियमों के तहत आवश्यक सूचना एवं दस्तावेज समय पर उपलब्ध नहीं कराने पर सवाल उठाए।
पोरलाल खर्ते का आरोप है कि इस दौरान रेलवे विभाग के अधिकारी श्री सिन्हा ने कथित तौर पर कहा कि उनके विभाग में इसी प्रकार कार्य किया जाता है। किसान ने इस कार्यप्रणाली को दादागिरी बताया, तो उनके अनुसार अधिकारी ने कहा कि इसे दादागिरी ही मान लीजिए, लेकिन उनके विभाग में कार्य करने का तरीका ऐसा ही है।
सीमांकन और जमीन में पोल गाड़ने पर जताई आपत्ति
इस व्यवहार से नाराज किसान पोरलाल खर्ते ने नियमानुसार पूर्व सूचना नहीं मिलने और आदेश की प्रति उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण मौके पर सीमांकन करने तथा जमीन में पोल गाड़ने पर आपत्ति जताई। किसान का आरोप है कि क्षेत्र में जिन अन्य किसानों की जमीन इंदौर-मनमाड़ रेल लाइन परियोजना के लिए अधिग्रहण की प्रक्रिया में शामिल है, उनके साथ भी इसी प्रकार का व्यवहार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पारदर्शिता, निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और किसानों के अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाना चाहिए। विशेषकर गरीब आदिवासी किसानों को उनकी जमीन से संबंधित कार्रवाई की उचित जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
अनुविभागीय अधिकारी से शिकायत करेंगे किसान
पोरलाल खर्ते ने पूरे मामले की शिकायत अनुविभागीय अधिकारी से करने की बात कही है। उन्होंने मांग की है कि संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली की जांच की जाए, सर्वे एवं भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में लागू नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए तथा प्रभावित किसानों को नियमानुसार सूचना और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराए जाएं।



