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धर्मेंद्र की याद में सुरों की शाम: स्थानीय कलाकारों ने पेश की दिल को छू लेने वाली प्रस्तुतियां

सेंधवा। सोमवार को हमारा सुर मंदिर सेंधवा के गायक कलाकारों ने मशहूर अभिनेता स्व. धर्मेंद्र को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम का आयोजन मज़हर भाई के अर्श स्टूडियो में किया गया, जहां कलाकारों ने धर्मेंद्र पर फिल्माए गए लोकप्रिय गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। पूरी शाम सुरों और संवेदनाओं से भरी रही, जिसमें कलाकारों ने अपने स्वरों के माध्यम से अभिनेता की यादों को सजीव कर दिया।

कार्यक्रम में बापू हटकर ने “ओ मेरी महबूबा तुझे जाना हो तो” गीत प्रस्तुत किया। प्रवीण राठौर और राजू ने “चल राजू” गीत गाया, जबकि दीपक भार्गव ने “छलकाएं जाम आइए” से माहौल को संगीतमय किया। दीपक गुजरे ने “ड्रीम गर्ल, किसी शायर की ग़ज़ल” और सिराज खान ने “हुई शाम उनका ख़याल आ गया” से श्रोताओं को भावुक कर दिया। बबलू चौधरी ने “इक हंसी शाम को दिल मेरा” पेश किया, वहीं अब्दुल हाफिज कुरेशी ने “मैं तेरे इश्क में मरना जाऊं कहीं” गीत गाकर समां बांध दिया।

कार्यक्रम में विकास प्रजापति ने “हम बेवफा हरगिज़ न थे” और प्रकाश गायकवाड ने “तुम्हारे प्यार में हम बेकरार होके” गाया। माधव प्रजापति ने “मैं तुझे छोड़कर कहां जाऊंगा” और रवि वर्मा ने “छलकाएं जाम आइए” गीत पेश किया। जितेन्द्र बाविस्कर और भार्गव की युगल प्रस्तुति “सात अजूबे इस दुनिया में, आठवीं अपनी जोड़ी” ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। गायक पप्पू सेन ने “दिल हूंम हूंम करे”, तथा अनिल चौधरी ने “नग्न सा रूप है तेरा” गाकर कार्यक्रम में गहराई जोड़ी।

सभी कलाकारों ने एक से बढ़कर एक गीत प्रस्तुत किए, जिससे पूरा कार्यक्रम यादगार बन गया। कार्यक्रम की सफलता में मज़हर और सुलतान का उत्कृष्ट साउंड संचालन भी प्रमुख रहा, जिन्होंने स्व. धर्मेंद्र की यादों को और अधिक जीवंत कर दिया। शानदार प्रस्तुतियों के लिए सभी कलाकारों को साधुवाद दिया गया।

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