सेंधवा के प्राचीन देवझिरी मंदिर में 11 जुलाई से शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा, तीन दिवसीय महोत्सव होगा आयोजित
देवझिरी मंदिर सामाजिक सेवा समिति ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित महोत्सव में शामिल होकर प्राण प्रतिष्ठा एवं महाप्रसादी का लाभ लेने की अपील की।

जनोदय पंच। सेंधवा के प्राचीन देवझिरी मंदिर में 11 से 13 जुलाई तक शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजित होगा। मंदिर के जीर्णोद्धार के बाद भगवान श्रीगणेश, माता पार्वती और भगवान कार्तिकेय की प्रतिमाओं की स्थापना होगी तथा अंतिम दिन पूर्णाहुति और भंडारे का आयोजन किया जाएगा।
11 जुलाई से शुरू होगा तीन दिवसीय महोत्सव
सेंधवा। शहर के प्राचीन देवझिरी मंदिर का जीर्णोद्धार कार्य लगभग पूर्ण हो चुका है। इसके बाद मंदिर में शिव परिवार की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। तीन दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव 11 से 13 जुलाई तक आयोजित होगा। महोत्सव के अंतिम दिन पूर्णाहुति एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। निर्माण कार्यों को अंतिम रूप देने के लिए स्थानीय रहवासी रात्रि में भी श्रमदान कर रहे हैं। देवझिरी मंदिर सामाजिक सेवा समिति विभिन्न व्यवस्थाओं में जुटी हुई है।
नई प्रतिमाओं की होगी स्थापना, सहयोग की अपील
समिति से मिली जानकारी के अनुसार मंदिर में भगवान श्रीगणेश, माता पार्वती एवं भगवान कार्तिकेय की नई प्रतिमाओं की प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। आयोजन को सफल बनाने के लिए समाजजन एवं श्रद्धालुओं का सहयोग लिया जा रहा है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा अनुसार अन्न, घी, तेल, दाल, चावल, सब्जी, फल अथवा आर्थिक सहयोग देकर आयोजन में सहभागी बन सकते हैं। समिति के पदाधिकारी सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। मंदिर समिति ने श्रद्धालुओं से परिवार सहित कार्यक्रम में शामिल होकर प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव एवं महाप्रसादी का लाभ लेने का आग्रह किया है।
150 वर्ष बाद मंदिर को मिला नया स्वरूप
देवझिरी स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर का लगभग 150 वर्ष बाद जीर्णोद्धार किया गया है। मंदिर को राजस्थान के धौलपुर से लाए गए लाल पत्थरों से नया स्वरूप प्रदान किया गया है। जीर्णोद्धार के बाद मंदिर के गर्भगृह का आकार पहले की तुलना में दोगुने से अधिक हो गया है, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन और पूजन में अधिक सुविधा मिल सकेगी।
स्वयंभू शिवलिंग और झिरी के प्रति अटूट आस्था
देवझिरी मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं की विशेष आस्था है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यह जिले का एकमात्र मंदिर है, जहां स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है। वर्षों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन एवं पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे हैं। मंदिर परिसर स्थित झिरी के प्रति भी लोगों की गहरी श्रद्धा है। महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।



