आदर्श महाविद्यालय में इंडक्शन एवं दीक्षारंभ समारोह आयोजित
मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को दिए मार्गदर्शन

बड़वानी। शासकीय आदर्श महाविद्यालय बड़वानी में आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग, भोपाल के निर्देशानुसार मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम के अंतर्गत इंडक्शन एवं नवप्रवेशित विद्यार्थियों के लिए दीक्षारंभ समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगान से हुआ तथा मां सरस्वती पूजन के पश्चात अतिथि स्वागत एवं परिचय के साथ महाविद्यालय की संक्षिप्त रूपरेखा प्रस्तुत की गई।
कार्यक्रम में प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने कहा कि आज किसी भी आयु वर्ग के लिए मानसिक तनाव एक गंभीर समस्या बन चुका है, जिससे मुक्ति ही प्रगति का मार्ग है। उन्होंने कहा कि नए सत्र का प्रथम दिवस विद्यार्थियों के दीक्षारंभ के रूप में मनाया जा रहा है, जो प्राध्यापकों और विद्यार्थियों के बीच संवाद स्थापित कर आगे की दिशा तय करने का अवसर प्रदान करता है।

मानसिक स्वास्थ्य और तनाव प्रबंधन पर जोर
मुख्य वक्ता डॉ. विनय गोरे ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि छोटी-छोटी गलतियों को बड़े तनाव के रूप में नहीं लेना चाहिए, बल्कि तनाव प्रबंधन आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अपनी समस्याओं को संवाद का हिस्सा बनाकर समाधान प्राप्त किया जा सकता है। डिजिटल जीवन जहां तनाव का कारण बन सकता है, वहीं सही उपयोग से यह मुक्ति का माध्यम भी बनता है, इसलिए स्क्रीन टाइम का संतुलन जरूरी है।

प्रेरणा, संवाद और सांस्कृतिक संदेश
कार्यक्रम में छात्र प्रतिनिधि शिवम मिश्र ने विद्यार्थियों को मां और मातृभूमि से जुड़े रहने की प्रेरणा दी। विद्यार्थी परिषद के संगठन मंत्री दिव्यांशु ठाकुर ने प्राचीन भारतीय शिक्षा परंपरा का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को समृद्ध अतीत से सीख लेकर उज्ज्वल भविष्य निर्माण की बात कही। वहीं डॉ. बी.एस. मुजाल्दा ने निरंतर प्रगति, संवाद और परस्पर सहयोग पर जोर दिया।
कार्यक्रम में पप्पू जी जमरे अभिभावक के रूप में उपस्थित रहे। साथ ही डॉ. दिनेश पाटीदार, डॉ. अंतिमबाला जायसवाल, डॉ. लखन परमार सहित अन्य प्राध्यापकों का सहयोग रहा। संचालन स्वामी विवेकानंद कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के डॉ. अनिल पाटीदार द्वारा किया गया तथा आभार प्रदर्शन प्रो. राजाराम मुवेल (एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी) ने किया। कार्यक्रम के अंत में वंदे मातरम का गायन किया गया और इसके डेढ़ सौ वर्ष पूरे होने पर इसे जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प भी दोहराया गया।



