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मनमाड–इंदौर रेल परियोजना को तीन भागों में बांटकर तीन डीपीआर व तीन टेंडर जारी करने की मांग

रेलवे मामलों की संसदीय समिति के समक्ष रखा जाएगा प्रस्ताव, सांसदों-विधायकों का समर्थन जुटाएगी संघर्ष समिति

सेंधवा। बहुप्रतीक्षित मनमाड–इंदौर रेल परियोजना के निर्माण कार्य में तेजी लाने तथा बढ़ती देरी को रोकने के लिए मनमाड–इंदौर रेलवे संघर्ष समिति ने परियोजना को तीन भागों में विभाजित कर तीन अलग-अलग डीपीआर एवं तीन पृथक टेंडर जारी करने की मांग उठाई है। संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने कहा कि 306 किलोमीटर लंबी इस परियोजना को लगभग 102-102 किलोमीटर के तीन खंडों में विभाजित कर अलग-अलग निर्माण एजेंसियों को कार्य सौंपा जाए, जिससे तीनों हिस्सों में एक साथ निर्माण कार्य शुरू हो सके और परियोजना निर्धारित समय में पूरी हो सके।

मराठे ने बताया कि परियोजना को स्वीकृति मिले लगभग दो वर्ष से अधिक समय हो चुका है, लेकिन आज भी रेलवे और राजस्व विभाग का संयुक्त सर्वे सभी जिलों में समान गति से प्रारंभ नहीं हो पाया है। वर्तमान में मुख्य रूप से बड़वानी जिले के सेंधवा क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण और सर्वेक्षण संबंधी कार्य चल रहे हैं, जबकि अन्य प्रभावित जिलों में कार्य अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ पाया है। इससे स्पष्ट है कि यदि परियोजना को एक ही इकाई के रूप में आगे बढ़ाया गया तो निर्माण में और अधिक समय लग सकता है तथा लागत भी बढ़ सकती है।

उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण का कार्य अंतिम चरण में पहुंच रहा है। दावे-आपत्तियों के निराकरण तथा अवार्ड प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद रेलवे द्वारा झाड़ियां हटाने, गिट्टी बिछाने एवं अन्य प्रारंभिक निर्माण कार्य शुरू किए जाएंगे। ऐसे समय में परियोजना को तीन हिस्सों में बांटकर अलग-अलग टेंडर जारी करना अत्यंत आवश्यक है।

रेलवे मामलों की संसदीय समिति के समक्ष रखा जाएगा प्रस्ताव

संघर्ष समिति ने निर्णय लिया है कि इस मांग को रेलवे मामलों की संसदीय समिति के समक्ष प्रमुखता से रखा जाएगा। इसके लिए समिति के क्षेत्रीय प्रतिनिधि अपने-अपने क्षेत्रों के सांसदों से व्यक्तिगत मुलाकात कर समर्थन प्राप्त करेंगे तथा उनसे अनुरोध करेंगे कि वे इस प्रस्ताव को संसद और संसदीय समिति के समक्ष उठाएं।

समिति द्वारा इंदौर सांसद शंकर लालवानी, खरगोन-बड़वानी सांसद गजेंद्र सिंह पटेल, राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी, धुलिया सांसद शोभा ताई बच्छाव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों से समर्थन लेने की रणनीति बनाई गई है। संघर्ष समिति स्वयं भी सांसदों के साथ मिलकर रेलवे मंत्रालय और संसदीय समिति के समक्ष यह प्रस्ताव रखेगी।

सांसदों के पूर्व प्रयासों की सराहना

मनोज मराठे ने कहा कि मनमाड–इंदौर रेल परियोजना को आगे बढ़ाने में क्षेत्रीय सांसदों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राज्यसभा सांसद सुमेर सिंह सोलंकी ने संसद में अनेक अवसरों पर इस परियोजना का मुद्दा उठाकर रेलवे मंत्रालय का ध्यान आकर्षित किया तथा विभिन्न स्तरों पर सहयोगी प्रयास किए।

इसी प्रकार खरगोन-बड़वानी लोकसभा सांसद गजेंद्र सिंह पटेल ने भी कई बार लोकसभा के प्रश्नकाल और अन्य संसदीय माध्यमों से मनमाड–इंदौर रेल परियोजना का विषय उठाकर केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित कराया। संघर्ष समिति ने उनके प्रयासों को परियोजना के लिए अत्यंत सराहनीय बताया है।

36 विधायकों से भी लिया जाएगा समर्थन

संघर्ष समिति प्रमुख ने बताया कि मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के परियोजना प्रभावित क्षेत्रों के लगभग 36 विधायकों से भी संपर्क किया जाएगा। उनसे विधानसभा के माध्यम से प्रस्ताव पारित कराने तथा दोनों राज्य सरकारों द्वारा रेलवे मामलों की संसदीय समिति को अशासकीय संकल्प भेजने का अनुरोध किया जाएगा। समिति के क्षेत्रीय सहयोगी अपने-अपने क्षेत्रों में जनप्रतिनिधियों से संपर्क कर इस अभियान को आगे बढ़ाएंगे।

पूर्व रेल मंत्री सुरेश प्रभु को भी दिया गया था प्रस्ताव

मनोज मराठे ने बताया कि परियोजना को तीन भागों में विभाजित करने का सुझाव पहली बार अभी नहीं दिया जा रहा है। पूर्व में रेल मंत्री सुरेश प्रभु के धुलिया आगमन के दौरान मनमाड–इंदौर रेलवे संघर्ष समिति ने उन्हें यह प्रस्ताव सौंपा था कि परियोजना को चरणबद्ध तरीके से तीन हिस्सों में विभाजित कर अलग-अलग टेंडर जारी किए जाएं।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्यवश उस समय क्षेत्र के कुछ जनप्रतिनिधियों ने इस सुझाव का समर्थन नहीं किया, जिसके कारण यह प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ पाया। संघर्ष समिति का मानना है कि यदि उस समय इस प्रस्ताव पर अमल किया गया होता तो आज परियोजना काफी आगे बढ़ चुकी होती और निर्माण में होने वाली देरी तथा लागत वृद्धि से भी बचा जा सकता था।

राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष से भी हुई चर्चा

संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने बताया कि इस विषय को लेकर राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष अंतर सिंह आर्य से भी चर्चा की गई है। उन्हें परियोजना को तीन भागों में विभाजित करने तथा निर्माण कार्य में तेजी लाने का प्रस्ताव सौंपा गया है। आयोग स्तर पर भी इस विषय को संबंधित विभागों के समक्ष रखने का आश्वासन दिया गया है।

क्षेत्र के विकास की जीवनरेखा है परियोजना

संघर्ष समिति का मानना है कि मनमाड–इंदौर रेल परियोजना निमाड़, मालवा, खानदेश तथा आदिवासी अंचलों के आर्थिक, सामाजिक, औद्योगिक और व्यापारिक विकास की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह रेल मार्ग मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के बीच संपर्क को मजबूत करने के साथ-साथ कृषि, उद्योग, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर भी उपलब्ध कराएगा।

संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि रेलवे मंत्रालय, संसदीय समिति, सांसदों, विधायकों और दोनों राज्य सरकारों का सहयोग मिला तो परियोजना को तीन भागों में विभाजित कर तीन डीपीआर एवं तीन टेंडर जारी करने का रास्ता प्रशस्त होगा। इससे निर्माण कार्य में तेजी आएगी और क्षेत्र की जनता का दशकों पुराना मनमाड–इंदौर रेल मार्ग का सपना शीघ्र साकार हो सकेगा।

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