अंतर हाथ सहार दे, बाहर मारे चोट – प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित
गुरु पूर्णिमा पर शा. आदर्श महाविद्यालय बड़वानी में गुरु सांदीपनि का पूजा अर्चन-

बड़वानी ; उच्च शिक्षा विभाग, मध्यप्रदेश शासन के निर्देशानुसार शासकीय आदर्श महाविद्यालय, बड़वानी में गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व श्रद्धा, भक्ति एवं भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के अनुरूप उत्साहपूर्वक मनाया गया। भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों को स्मरण करते हुए महर्षि गुरु सांदीपनि के चित्र का विधिवत पूजन-अर्चन एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित गुरु की महिमा और गुरु – शिष्य के संबंधों को लेकर कहा कि– गुरु कुम्हार शिष्य कुंभ है ,गढै- गढै खाढे खोट,, अंतर हाथ सहार दे, बाहर मारे चोट। महाविद्यालय के प्राध्यापकों द्वारा गुरु सांदीपनि के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित किया गया। इसके पश्चात सामूहिक रूप से गुरु वंदना प्रस्तुत की गई।

इस अवसर पर प्राचार्य डॉ. प्रमोद पंडित ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को ईश्वर से भी श्रेष्ठ स्थान प्रदान किया गया है। गुरु केवल ज्ञान का संचार ही नहीं करते, बल्कि व्यक्तित्व का निर्माण कर जीवन को सही दिशा प्रदान करते हैं। महर्षि वेदव्यास एवं गुरु सांदीपनि जैसी महान विभूतियों ने भारतीय ज्ञान परंपरा को समृद्ध बनाया है, जिसके कारण भारत विश्वगुरु के रूप में प्रतिष्ठित हुआ।
कार्यक्रम में डॉ. दिनेश पाटीदार ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि गुरु का स्थान केवल कक्षा तक सीमित नहीं होता, बल्कि गुरु जीवन के प्रत्येक चरण में मार्गदर्शक की भूमिका निभाते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से निरंतर अध्ययन, अनुशासन, परिश्रम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को अपने व्यवहार में अपनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम का सबसे भावपूर्ण क्षण वह रहा जब महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने अपने सभी शिक्षकों को पुष्पगुच्छ एवं पुष्प भेंट कर उनका सम्मान किया तथा उनसे आशीर्वाद प्राप्त किया। विद्यार्थियों ने गुरुजनों के प्रति अपनी श्रद्धा और सम्मान व्यक्त करते हुए जीवन में उनके मार्गदर्शन के प्रति कृतज्ञता प्रकट की। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को उज्ज्वल भविष्य, उत्कृष्ट चरित्र एवं राष्ट्रसेवा के लिए शुभकामनाएँ प्रदान कीं। मंच से डॉ.आकाश एस्के ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी विशेषता उसकी गुरु-शिष्य परंपरा रही है। यह परंपरा केवल ज्ञान प्रदान करने तक सीमित नहीं थी, बल्कि जीवन मूल्यों, नैतिकता, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की भावना का भी विकास करती थी।

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित राष्ट्रीय सेवा योजना के कार्यक्रम अधिकारी प्रो. राजाराम मुवेल, डॉ. लखन परमार तथा डॉ. रितेश भावसार, डॉ.अंतिमबाला जायसवाल ने कार्यक्रम के सफल आयोजन में सक्रिय सहयोग प्रदान किया। सभी शिक्षकों एवं कर्मचारियों की सहभागिता से कार्यक्रम अत्यंत सफल एवं प्रेरणादायी रहा। कार्यक्रम का सफल संचालन भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के संयोजन में किया गया। अंत में स्वामी विवेकानंद करियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ के नोडल अधिकारी डॉ. अनिल पाटीदार ने सभी अतिथियों, प्राध्यापकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गुरु पूर्णिमा जैसे आयोजन भारतीय संस्कृति के मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम हैं।



