सेंधवा में मनमाड–इंदौर रेलवे परियोजना को मिली रफ्तार,सेंधवा क्षेत्र में शुरू हुआ संयुक्त सर्वे, मालवन-भामनिया के बीच बनेगी प्रदेश की सबसे लंबी रेलवे सुरंग
भामनिया से प्रारंभ हुए संयुक्त सर्वे में किसानों की परिसंपत्तियों के मूल्यांकन और उचित मुआवजे पर दिया गया जोर

जनोदय पंच। सेंधवा क्षेत्र में मनमाड–इंदौर रेलवे परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण के लिए संयुक्त सर्वे शुरू हो गया है। भामनिया से प्रारंभ हुए इस सर्वे में राजस्व और रेलवे विभाग की संयुक्त टीम शामिल रही। अधिकारियों ने किसानों की भूमि और परिसंपत्तियों का निष्पक्ष मूल्यांकन कर उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया।
संयुक्त सर्वे से परियोजना को मिली गति
सेंधवा, 13 मई 2026। बहुप्रतीक्षित मनमाड–इंदौर रेलवे परियोजना के अंतर्गत सेंधवा अनुविभाग क्षेत्र में भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज हो गई है। ग्राम भामनिया से राजस्व विभाग एवं रेलवे प्रशासन की संयुक्त टीम ने कम्पलसरी लैंड एक्विजिशन एक्ट 2008 के तहत संयुक्त सर्वे कार्य का औपचारिक शुभारंभ किया। संघर्ष समिति प्रमुख मनोज मराठे ने एसडीएम श्री आशीष से चर्चा कर बताया कि मध्यप्रदेश में मनमाड–इंदौर रेलवे परियोजना का पहला संयुक्त सर्वे सेंधवा क्षेत्र से प्रारंभ हुआ है। उन्होंने कहा कि सर्वे में सभी बारीकियों का ध्यान रखा जा रहा है ताकि किसानों और प्रभावित जमीन मालिकों को शासन के निर्देशानुसार उचित मुआवजा मिल सके।
एसडीएम कार्यालय में हुई बैठक, दिए गए निर्देश
संयुक्त सर्वे प्रारंभ होने से पहले सेंधवा एसडीएम कार्यालय में अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) श्री आशीष ने अधिकारियों और कर्मचारियों की बैठक ली। बैठक में तहसीलदार राहुल सोलंकी, नायब तहसीलदार श्री समीर कुमार, श्री शर्मा, श्री कोठारी, राजस्व निरीक्षक, पटवारी एवं रेलवे सर्वे दल के अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में निर्देश दिए गए कि भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष हो। किसानों की भूमि, फसल, मकान, कुएं, पेड़-पौधों एवं अन्य परिसंपत्तियों का विस्तृत मूल्यांकन कर पंचनामे में शामिल करने को कहा गया। रेलवे के वरिष्ठ खंड अभियंता श्री ओम नारायण सिन्हा एवं श्री समीर कुमार ने कहा कि एसडीएम द्वारा दिए गए निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाएगा।
मालवन से भामनिया तक बनेगी 9.50 किलोमीटर लंबी सुरंग
मनमाड–इंदौर रेलवे संघर्ष समिति के प्रमुख मनोज मराठे ने बताया कि मालवन से भामनिया तक लगभग 9.50 किलोमीटर लंबी सुरंग प्रस्तावित है, जो परियोजना की सबसे बड़ी सुरंग होगी। जिस क्षेत्र में संयुक्त सर्वे प्रारंभ हुआ है, वह इसी सुरंग क्षेत्र का हिस्सा है। अधिकारियों के अनुसार संयुक्त सर्वे के आधार पर प्रत्येक किसान की प्रभावित भूमि का निर्धारण कर पंचनामा तैयार किया जाएगा और शासन के नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप न्यायसंगत मुआवजा प्रदान किया जाएगा। परियोजना को क्षेत्र के आर्थिक विकास, रोजगार सृजन और परिवहन सुविधाओं के विस्तार की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



