ग्राम भातकी की लाल मिर्च बनी नंदुरबार मंडी में आकर्षण का केंद्र
किसान बालकृष्ण पाटिल ने आधुनिक तकनीक से कम बारिश में तैयार की शानदार फसल, 5,550 रुपये प्रति क्विंटल मिला उच्चतम भाव

शंकर सिरसाठ खेतिया। आधुनिक कृषि तकनीक और मेहनत के दम पर किसान खेती को लाभ का धंधा बना सकते हैं। इसका उदाहरण ग्राम भातकी के प्रगतिशील किसान बालकृष्ण पाटिल ने पेश किया है। उन्होंने कम बारिश और वायरस के संक्रमण जैसी चुनौतियों के बावजूद अपने खेत में लाल मिर्च की अच्छी फसल तैयार की है। उनकी मिर्च महाराष्ट्र की नंदुरबार कृषि उपज मंडी में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जहां व्यापारी भी फसल की गुणवत्ता को पसंद कर रहे हैं।

किसान बालकृष्ण पाटिल ने बताया कि उन्होंने इस वर्ष जून माह में महाराष्ट्र के ग्राम बामलोद निवासी श्री प्रहलाद भगवान पाटिल और योगेश भगवान पाटिल से प्रेरणा लेकर अपने खेत में शार्क-1 प्रजाति की F1 वैरायटी की लाल मिर्च की बुवाई की थी। फसल को कम बारिश और वायरस के संक्रमण से बचाने के लिए उन्होंने विशेष सावधानी बरती। साथ ही, रासायनिक एवं जैविक खेती के बेहतर तालमेल के साथ ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग तकनीक का उपयोग किया।

इन आधुनिक तकनीकों और उचित प्रबंधन के परिणामस्वरूप उनके खेत में लाल मिर्च की अच्छी फसल तैयार हुई। किसान अपनी उपज को नंदुरबार मंडी में बेच रहे हैं, जहां उन्हें अच्छे भाव मिल रहे हैं।
15 अक्टूबर को मिला 5,550 रुपये का उच्चतम भाव
बीते गुरुवार, 15 अक्टूबर को नंदुरबार मंडी में बालकृष्ण पाटिल की लाल मिर्च को 5,550 रुपये प्रति क्विंटल का उच्चतम भाव मिला। मिर्च की गुणवत्ता देखकर व्यापारियों ने भी इसमें रुचि दिखाई। इससे किसान का उत्साह बढ़ा है और क्षेत्र के अन्य किसानों को भी आधुनिक तकनीक अपनाकर खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त करने की प्रेरणा मिल रही है।
आधुनिक तकनीक से खेती बन सकती है लाभ का धंधा
प्रगतिशील किसान बालकृष्ण पाटिल का कहना है कि खेती में नई तकनीकों का उपयोग करके कम समय और कम बारिश जैसी परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और फसल प्रबंधन जैसी तकनीकें पानी के बेहतर उपयोग तथा फसल की गुणवत्ता सुधारने में सहायक हो सकती हैं।
उन्होंने किसानों को पारंपरिक खेती के साथ आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने और फसल की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का संदेश दिया। ग्राम भातकी के किसान की यह पहल बताती है कि सही तकनीक, मेहनत और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।



