निवाली के दिव्यांग आश्रम में सेवा संकल्प अभियान के तहत बांटी शिक्षण सामग्री, एक हजार कॉपी-पेंसिल से विद्यार्थियों को मिली मदद
बीईओ मनोज मराठे ने बच्चों को शिक्षा, अनुशासन और आत्मविश्वास का महत्व बताया, अतिथियों ने विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए किया प्रेरित

जनोदय पंच। निवाली के झाकर स्थित दिव्यांग आश्रम में सेवा संकल्प अभियान-2026 के अंतर्गत जरूरतमंद दिव्यांग विद्यार्थियों को शिक्षण सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम में बच्चों को कॉपी, पेंसिल, रबर और शार्पनर दिए गए। अतिथियों ने विद्यार्थियों को शिक्षा, अनुशासन और आत्मनिर्भरता के प्रति प्रेरित किया।
मेरी सेवा, मेरा योगदान’ अभियान के अंतर्गत 10 अक्टूबर 2026 को पद्मश्री स्व. कांता बहन त्यागी ‘दीदी’ द्वारा स्थापित श्री कांता विकलांग सेवा ट्रस्ट, झाकर (निवाली) में शिक्षण सामग्री वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। निवाली विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनोज मराठे सहित आमंत्रित जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों ने जरूरतमंद दिव्यांग विद्यार्थियों को कॉपी, पेंसिल, रबर और शार्पनर सहित आवश्यक सामग्री प्रदान की।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. हुकुम पवार थे। इस अवसर पर कस्तूरबा वनवासी कन्या आश्रम निवाली की प्रतिनिधि सुश्री पुष्पा दीदी, संकुल प्राचार्य प्रताप सोलंकी, खेल शिक्षक जगदीश पाटिल, निगवाल बाबूजी, दिव्यांग शाला के प्रधान पाठक एम.एल. सिरसाठ, बालिका आश्रम की वार्डन प्रभारी कविता सोलंकी, शिक्षक राजेंद्र निकुम, विनोद डावर, ज्योति अहीर, मनीषा काले सहित अन्य उपस्थित रहे।
शिक्षा और अनुशासन से हासिल कर सकते हैं हर मुकाम:
विकासखंड शिक्षा अधिकारी मनोज मराठे ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि बच्चे अपने शिक्षकों के मार्गदर्शन, निरंतर मेहनत, अनुशासन और पढ़ाई के बल पर दुनिया का कोई भी मुकाम हासिल कर सकते हैं। सफलता प्राप्त करने में परिस्थितियां बाधा नहीं बनतीं। दृढ़ इच्छाशक्ति, आत्मविश्वास और निरंतर प्रयास से हर चुनौती का सामना किया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए शिक्षा सबसे महत्वपूर्ण माध्यम है। विद्यार्थियों को नियमित रूप से विद्यालय में अध्ययन करना चाहिए, शिक्षकों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनना चाहिए और अपने लक्ष्य को निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। अनुशासन जीवन को सही दिशा देता है और शिक्षा व्यक्ति को आत्मनिर्भर बनाती है।
दिव्यांगता को प्रतिभा की राह में बाधा न बनने दें:
बीईओ मनोज मराठे ने कहा कि दिव्यांगता किसी भी बच्चे की प्रतिभा, क्षमता और सफलता की राह में बाधा नहीं बननी चाहिए। प्रत्येक बच्चे में कुछ विशेष करने की क्षमता होती है। जरूरत उसे पहचानने, निखारने और सही अवसर देने की है।
उन्होंने विद्यार्थियों से स्वयं को किसी से कम न समझने और सकारात्मक सोच के साथ भविष्य का निर्माण करने का आह्वान किया। साथ ही शिक्षकों के मार्गदर्शन का लाभ उठाकर अपने ज्ञान, कौशल और आत्मविश्वास को लगातार बढ़ाने की बात कही। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने, उनकी व्यक्तिगत आवश्यकताओं को समझने तथा उन्हें शिक्षा, जीवन मूल्यों और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का आग्रह किया।

अतिथियों ने किया विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन:
कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों ने भी विद्यार्थियों को मन लगाकर पढ़ाई करने, अनुशासन बनाए रखने और जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सेवा एवं प्रेरणादायक कार्यक्रम दिव्यांग विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकास, आत्मविश्वास और उज्ज्वल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
अंत में छात्रावास परिवार की ओर से निकुम सर ने सभी अतिथियों का हार्दिक आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद दिया।




