खरगोन-बड़वानी

बड़वानी श्रावणी कर्म पूजा अर्चना का आयोजन रक्षा बंधन पर मन्त्रोच्चार के साथ ब्राह्मण समाज ने बदली जनेऊ

बड़वानी।जिला मुख्यालय पर रानीपूरा स्थित श्री गोड मालवीय ब्राह्मण धर्मशाला में ओर राजघाट रोड़ स्थित नार्मदीय ब्राह्मण समाज की धर्मशाला में ब्राह्मणों ने श्रावणी कर्म व पूजा अर्चना की। रक्षा बंधन के दिन प्रायश्चित, स्वाध्याय और संस्कार के लिए श्रावणी उपकर्म ब्राह्मण समाज की ओर से किया गया।

विधि विधान से परंपरागत तरीके से पूजन अर्चन करते हुए नया यज्ञोपवीत (जनेऊ) धारण किया गया। इसमें बड़ी संख्या में बटुकों ने भी हिस्सा लिया। इस मौके पर भूलवश अथवा जानकर किए गए पापों के लिए भी प्रायश्चित किया गया। हिमाद्री संकल्प के साथ विप्र समाज ने वैदिक कालीन परंपरा का निर्वहन किया। पूजन में उपस्थित सभी विप्रों ने मन्त्रोच्चार के साथ पंचगव्य से स्नान कर भस्म लेपन किया।

पंडितों ने बताया- पौराणिक मान्यता के अनुसार श्रावणी धार्मिक स्वाध्याय के प्रचार का पर्व है। सज्ञान, बुद्धि, विवेक और धर्म की वृद्धि के लिए इसे निर्मित किया गया, इसलिए इसे ब्रह्म पर्व भी कहते हैं। श्रावणी वैदिक पर्व है। प्राचीन काल में ऋषि-मुनि इसी दिन से वेद पारायण आरंभ करते थे। इसे ‘उपाकर्म’ कहा जाता था।

श्रावणी पर्व पर द्विजत्व के संकल्प का नवीनीकरण किया जाता है। उसके लिए परंपरागत ढंग से तीर्थ अवगाहन, दश स्नान, हिमाद्रि संकल्प एवं तर्पण आदि कर्म किए जाते हैं। इस दौरान ब्राह्मण समाज के समाजगण उपस्थित थे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!