सेंधवा में माली समाज की मां-बेटे ने लिया मरणोपरांत देहदान का संकल्प, समाजजनों ने घर पहुंचकर किया सम्मान
मानव सेवा समिति की प्रेरणा से कोकिलाबाई रघुनाथ और पुत्र सचिन रघुनाथ महाजन ने लिया निर्णय, समाज ने बताया अनुकरणीय पहल

जनोदय पंच। सेंधवा में माली समाज की मां-बेटे ने मरणोपरांत देहदान करने का संकल्प लेकर मानव सेवा की मिसाल पेश की है। उनके इस निर्णय पर समाजजनों ने निवास पहुंचकर शाल, श्रीफल और पुष्पमाला से सम्मान किया। समाजबंधुओं ने इसे गौरवशाली और प्रेरणादायक पहल बताया।
मानव सेवा समिति की प्रेरणा से लिया निर्णय
माली समाज की कोकिलाबाई रघुनाथ एवं उनके पुत्र सचिन रघुनाथ महाजन ने मानव सेवा समिति की प्रेरणा से अपने निधन के पश्चात देहदान करने का निर्णय लिया है। उल्लेखनीय है कि कोकिलाबाई, स्वर्गीय रघुनाथ धोड़ूं महाजन की पत्नी हैं। मां-बेटे के इस निर्णय का समाजबंधुओं ने स्वागत करते हुए इसे मानव सेवा और सामाजिक जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।
समाजजनों ने निवास पहुंचकर किया सम्मान
इस अवसर पर माली समाज के संरक्षक मडकू सखाराम बावीस्कर, शम्भू सुखलाल महाजन, पूनम महाजन, सदाशिव निकुम एवं दीपक महाजन उनके निवास पर पहुंचे। यहां सभी ने कोकिलाबाई एवं सचिन महाजन का शाल, श्रीफल और पुष्पमाला पहनाकर सम्मान किया तथा उनके निर्णय की सराहना की।
समाजजनों ने कहा कि मरणोपरांत देहदान का संकल्प लेना साहसिक और मानवता की भावना से जुड़ा कार्य है। सामान्यतः व्यक्ति अपने शरीर के प्रति भावनात्मक लगाव रखता है, लेकिन कोकिलाबाई और सचिन महाजन ने मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करने का निर्णय लेकर समाज का मान बढ़ाया है।
देहदान से मेडिकल विद्यार्थियों को मिलता है अध्ययन का अवसर
समाजजनों ने देहदान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि नेत्रदान से जरूरतमंद लोगों को दृष्टि मिलने में मदद मिल सकती है। वहीं देहदान के माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को मानव शरीर की संरचना का गहन अध्ययन करने का अवसर मिलता है। इससे भविष्य में कुशल चिकित्सक तैयार करने में सहायता मिलती है। इसके अलावा त्वचा दान से जरूरतमंद मरीजों के उपचार में भी मदद मिल सकती है।
आने वाली पीढ़ियों के लिए बनेगा प्रेरणा का संदेश
समाजजनों ने कहा कि जीवन में सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म है। यदि मृत्यु के बाद भी हमारा शरीर किसी के काम आ सके, तो इससे बड़ा परोपकार कोई नहीं हो सकता। कोकिलाबाई एवं सचिन महाजन का यह संकल्प आने वाली पीढ़ियों के लिए मानव सेवा, त्याग और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश बनेगा।
समाजबंधुओं ने मां-बेटे के इस अनुकरणीय निर्णय का अभिनंदन करते हुए समाज में देहदान एवं अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि अधिक से अधिक लोगों को इस पुनीत कार्य के लिए आगे आना चाहिए।



