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बड़वानी के खुटवाड़ी गांव से IIT खड़गपुर तक चेतन की उड़ान, 12वीं में असफलता के बाद रचा नया इतिहास

ऑनलाइन पढ़ाई, खेती के काम और लगातार मेहनत के दम पर चेतन सोलंकी ने जेईई एडवांस में सफलता हासिल की।

जनोदय पंच। वरला तहसील के खुटवाड़ी गांव के किसान परिवार से आने वाले चेतन सोलंकी ने 2025 में 12वीं में असफल होने के बाद हार नहीं मानी। एक वर्ष बाद प्रथम श्रेणी से परीक्षा उत्तीर्ण कर जेईई एडवांस में सफलता हासिल करते हुए आईआईटी खड़गपुर में प्रवेश प्राप्त किया।

वरला तहसील के खुटवाड़ी गांव के किसान पुत्र चेतन सोलंकी हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बनकर उभरे हैं। वर्ष 2025 में 12वीं कक्षा में असफल होने के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। एक वर्ष बाद उन्होंने प्रथम श्रेणी से 12वीं उत्तीर्ण की और जेईई एडवांस में सफलता प्राप्त कर इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) खड़गपुर में प्रवेश हासिल किया।

खेती से जुड़ा सपना और इंजीनियरिंग का चयन

चेतन किसान परिवार से आते हैं। उनके दादा-दादी और माता-पिता पारंपरिक खेती करते हैं। इसी वातावरण में पले-बढ़े चेतन का सपना खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ना रहा है। इसी उद्देश्य से उन्होंने आईआईटी खड़गपुर में एग्रीकल्चर एंड फूड इंजीनियरिंग शाखा का चयन किया। उनका कहना है कि इंजीनियरिंग पूरी करने के बाद वे आधुनिक कृषि तकनीकों को अपने घर और क्षेत्र तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे।

ऑनलाइन पढ़ाई और संघर्षों के बीच तैयारी

ग्रामीण एवं पहाड़ी क्षेत्र में रहने के कारण चेतन को इंटरनेट और बिजली की समस्याओं का सामना करना पड़ा। आर्थिक सीमाओं के कारण बड़े शहरों में कोचिंग करना संभव नहीं था। ऐसे में उन्होंने घर पर रहकर यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म की शैक्षणिक सामग्री से तैयारी की। सिविल इंजीनियर काका ओंकार सोलंकी के मार्गदर्शन में उन्होंने नियमित अध्ययन जारी रखा। 1 जून को जेईई एडवांस का परिणाम घोषित हुआ और 13 जून को सीट आवंटन में उन्हें आईआईटी खड़गपुर में एग्रीकल्चर एंड फूड इंजीनियरिंग शाखा मिली।

खेती और पढ़ाई दोनों को दिया समय

चेतन ने पढ़ाई के साथ खेती के कार्यों में भी परिवार का सहयोग किया। उन्होंने पिता के साथ खेतों में दवा छिड़काव, फूलों की खेती में फूल तोड़ने तथा पशुओं को चारा-पानी देने जैसे कार्य किए। चेतन ने अपनी सफलता का श्रेय दादा-दादी, मामा, पिता और काका ओंकार को दिया। उन्होंने बताया कि प्रतिदिन 12 से 13 घंटे की पढ़ाई के दौरान मां और बहन विशेष रूप से उनका ध्यान रखती थीं।

परिवार ने जताया गर्व

तीन बहनों के इकलौते भाई चेतन का मानना है कि खेती केवल परंपरा नहीं बल्कि भविष्य का विज्ञान है। पिता कमल सोलंकी ने बताया कि चेतन बचपन से ही पढ़ाई में रुचि रखता था। गांव में स्कूल दूर होने के बावजूद वह नियमित रूप से पढ़ने जाता था। आगे की पढ़ाई के लिए उसे श्रमोदय आवासीय विद्यालय, इंदौर भेजा गया। काका ओंकार सोलंकी ने कहा कि यदि परिवार का बेटा कृषि शिक्षा के माध्यम से किसानों को नई दिशा देता है तो यह पूरे क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि होगी।

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